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जलका का जलस्तर घट रहा
भुवनेश्वर। जल संसाधन विभाग ने शनिवार को स्पष्ट किया कि राज्य की किसी भी नदी में फिलहाल बाढ़ जैसी स्थिति नहीं है। अधिकांश प्रमुख नदियां खतरे के निशान से काफी नीचे बह रही हैं। केवल जलका नदी, जो कुछ समय के लिए खतरे के स्तर को पार कर गई थी, अब घटाव पर है।
जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता चंद्रशेखर पाढ़ी ने शनिवार को पत्रकारों से बातचीत में बताया कि बूढ़ाबलंग और वैतरणी जैसी नदियां जो अक्सर भारी बारिश के दौरान बाढ़ का खतरा पैदा करती हैं, फिलहाल स्थिर हैं और विभाग द्वारा लगातार निगरानी की जा रही है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में किसी तरह की चिंता की आवश्यकता नहीं है। स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है।
पाढ़ी ने आगे कहा कि भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने अगले सात दिनों तक भारी वर्षा की कोई संभावना नहीं जताई है। इससे जलस्तर और घटने की उम्मीद है।
शनिवार सुबह 9 बजे तक हीराकुद जलाशय का जलस्तर 626.35 फीट दर्ज किया गया। बदलते जल प्रवाह को देखते हुए चार गेट बंद कर दिए गए हैं, जबकि 20 गेट से पानी छोड़ा जा रहा है। जलाशय में 3.85 लाख क्यूसेक पानी का प्रवाह हो रहा है, जबकि 4.24 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। पाढ़ी ने बताया कि यह नियंत्रित निकासी मानक बाढ़ प्रबंधन प्रोटोकॉल का हिस्सा है।
मुण्डली में रविवार शाम 6 बजे तक लगभग 5.50 लाख क्यूसेक पानी बहने की संभावना थी। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह प्रवाह प्रबंधनीय है और किसी बाढ़ की आशंका नहीं है।
विभाग ने सभी संवेदनशील स्थलों पर निगरानी बढ़ा दी है और क्षेत्रीय कर्मियों को नदी तटबंधों व जलाशयों पर चौकसी रखने के निर्देश दिए हैं।
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