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हेरापंचमी पर नीति संपन्न

प्रमोद कुमार प्रुष्टि, पुरी
महलक्ष्मी ने आज श्रीमंदिर से निकल कर गुंडिचा मंदिर के बाहर खड़े महाप्रभु श्रीजगन्नाथ के रथ नंदीघोष को तोड़ा. हेरापंचमी के अवसर यह नीति आयोजित की जाती है. उल्लेखनीय है कि श्रीमंदिर से महालक्ष्मी को विमान से सेवायत बड़दांड होते हुए गुंडिचा मंदिर के बाहर खड़े रथों तक लाये. इसके बाद हेरापंचमी पर रथ को तोड़ने की परंपरा निर्वहन किया गया.

उल्लेखनीय है कि महाप्रभु श्रीजगन्नाथ अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ रथयात्रा के दिन बाहर निकल आये हैं. इस दौरान महालक्ष्मी को वह साथ नहीं आते हैं. इससे गुस्से में महालक्ष्मी हेरापंचमी के दिन बाहर आती हैं और महाप्रभु के रथ को तोड़ती हैं.

हेरापंचमी के अवसर पर आज पती महापात्र सेवायत ने नंदीघोष रथ के पास बंदापना आरती महालक्ष्मी की संपन्न कराया. नंदीघोष रथ के एक छोटा हिस्सा तोड़ने की परंपरा का निर्वहन किया गया. महालक्ष्मी जी गुंडिचा मंदिर में प्रवेश कर भगवान महाप्रभु के दर्शन करने का प्रयास किया, लेकिन महाप्रभु के भोग का समय होने की वजह से दरवाजा बंद कर दिया गया. इससे निराश होकर महालक्ष्मी को वापस श्रीमंदिर लौटना पड़ा. लेकिन लौटते समय वह छुपछुपाकर आयीं, जबकि जाते समय धूमधाम व गाजे-बाजे के साथ वह श्रीमंदिर से गुंडिचा मंदिर जाती हैं.

रास्ते में बिराजते समय परंपरा के अनुसार पंक्तिभोग की नीति पूजा पंडा सेवायतों ने संपन्न करायी. इधर, लोक निर्माण विभाग के कर्चमारियों ने रथों की हालत को देखा. पता चला है कि नीराड़ी में हल्की दरार आयी है. इसे लेकर कोई बड़ी चिंता की बात नहीं है. इसमें लोहे का क्लैंप लगाकर दुरुस्त कर लिया जायेगा. यह जानकारी विभाग के वरिष्ठ अधिकारी एनसीपाल ने दी है.
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