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अगले 2026-27 सत्र से होगा लागू
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स्कूल एवं जन शिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड ने की घोषणा
राज्य के उच्च शिक्षा विभाग ने सरकारी सहायता प्राप्त कॉलेजों की अवसंरचना की व्यापक समीक्षा शुरू की है। छात्रों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विभाग ने सभी राज्य वित्तपोषित संस्थानों से तत्काल रिपोर्ट मांगी है, ताकि जर्जर और असुरक्षित इमारतों की पहचान कर आवश्यक कदम उठाए जा सकें। विभाग ने सभी कॉलेज प्राचार्यों को निर्देश दिया है कि वे असुरक्षित और जर्जर इमारतों का मूल्यांकन कर बिना देरी के अपनी रिपोर्ट सौंपें।
उच्च शिक्षा विभाग का पत्र
विभाग की ओर से जारी पत्र में कहा गया कि यह जानकारी मिली है कि कई कॉलेजों की कक्षाएं, प्रयोगशालाएं, कार्यालय भवन, शौचालय आदि जर्जर अवस्था में हैं, जो छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए खतरा बन सकते हैं। पत्र में आगे कहा गया कि ऐसी इमारतों की तत्काल समीक्षा कर उन्हें सक्षम प्राधिकरण द्वारा असुरक्षित घोषित किया जाए और इसकी रिपोर्ट तुरंत विभाग को भेजी जाए। साथ ही, कॉलेज अवसंरचना के समुचित विकास के लिए आवश्यक वित्तीय मांग भी प्रस्तुत की जाए, जिससे निर्माण और मरम्मत कार्य किया जा सके।
तत्काल रिपोर्टिंग और सुधार के निर्देश
कॉलेज प्राचार्यों को अपने संस्थानों में असुरक्षित हालात की जानकारी देने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार ने आश्वासन दिया है कि रिपोर्ट मिलने के बाद इस मुद्दे को प्राथमिकता के आधार पर हल किया जाएगा।
इन जर्जर भवनों से छात्रों और कर्मचारियों को गंभीर खतरा हो सकता है। ऐसे में, विभाग ने तुरंत इन इमारतों को असुरक्षित घोषित करने और उनके स्थान पर वैकल्पिक शैक्षिक सुविधाओं की व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं।
गौरतलब है कि असुरक्षित कॉलेज भवनों का मुद्दा पहले भी विधानसभा में उठाया जा चुका है, जिससे इस मामले की गंभीरता स्पष्ट होती है।
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