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ओडिशा हाईकोर्ट ने लगाई रोक
कटक। ओडिशा हाईकोर्ट ने राज्य के वर्क्स विभाग में सहायक कार्यकारी अभियंताओं (असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव इंजीनियर्स) की पदोन्नति प्रक्रिया पर अस्थायी रोक लगा दी है। यह फैसला विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) द्वारा की गई आरक्षण आधारित पदोन्नतियों को चुनौती देने के बाद आया है, जिससे कुछ इंजीनियरिंग समूह प्रभावित हुए हैं।
इंजीनियर हिरण्मयी नायक और उनके चार सहयोगियों द्वारा दायर याचिका के आधार पर यह निर्णय लिया गया। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के 51 अभियंताओं को मेरिट के आधार पर नहीं, बल्कि आरक्षण नीति के तहत पदोन्नत किया गया।
याचिका में कहा गया कि एसटी वर्ग के 38 और एससी वर्ग के 26 रिक्त पदों को अनदेखा कर इन अभियंताओं को अनारक्षित श्रेणी में पदोन्नत कर दिया गया। यह प्रक्रिया एससी और एसटी विकास विभाग द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों और जनवरी 2022 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का उल्लंघन करती है, जिसमें पहले प्रतिनिधित्व का आकलन करने की आवश्यकता बताई गई थी।
अन्य विभागों में भी अनियमितता का आरोप
याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि इसी तरह की अनियमितताएं वित्त और गृह विभागों में भी हुई हैं। आरोप है कि वित्त विभाग में 26 आरक्षित वर्ग के अधिकारियों को ओडिशा वित्त सेवा के अनारक्षित पदों पर पदोन्नत किया गया, जिससे यह प्रवृत्ति विभिन्न सरकारी विभागों में देखने को मिल रही है।
अदालती कार्यवाही और संभावित असर
न्यायमूर्ति एके महापात्र द्वारा पारित इस अंतरिम आदेश के तहत, हाईकोर्ट ने अंतिम डीपीसी सिफारिशों को न्यायिक अनुमति के बिना लागू करने से रोक दिया है। यह सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया गया है कि सभी पदोन्नतियां भारत की आरक्षण नीति और कानूनी प्रावधानों के अनुरूप हों।
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