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बच्चों को अलग भाषा में सिखाने पर उनके मन में आता है द्वंद्व – निर्मला सीतारमण
भुवनेश्वर। अपनी मातृभाषा में बात करने व सोचने वाले बच्चों को बाद में अलग भाषा सिखाने पर उनके मन में भ्रम की स्थिति उत्पन्न होती है। गुरुवार को भुवनेश्वर में वर्णमाला आधारित कुवि व देशिआ भाषा की पुस्तकों के साथ-साथ विशेष पोस्टल कवर का विमोचन करते हुए केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ये बातें कहीं।
उन्होंने कहा कि जब कोई बच्चा अपनी मातृभाषा में सिखता है, बातें करता है तथा सोचता है तब बाद की स्थिति में उसी भाषा में वह अपनी बात को ठीक से व्यक्त कर सकता है। लेकिन यदि उन्हें कोई दूसरी भाषा पढ़ने व बोलने के लिए कहा जाता है, तो बच्चों में भ्रम की स्थिति उत्पन्न होती है। इसके वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध है। इसलिए बच्चों को अपनी मातृभाषा में शिक्षा दिये जाने की आवश्यकता है। केन्द्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा क्षेत्रीय भाषाओं में पढ़ाई की पुस्तक तैयार कराने का प्रय़ास किया जा रहा है। स्थानीय भाषा व उपभाषाओं में पढ़ाई की पुस्तक तैयार की जानी प्रधानमंत्री मोदी के एक भारत व श्रेष्ठ भारत की संकल्पना को समृद्ध कर रही है।
इस अवसर पर केन्द्रीय शिक्षा, कौशल विकास व उद्यमिता मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने कहा कि कुवि व देशिआ भाषा में वर्णमाला सौ दिनों से कम दिनों में तैयार हुआ है।
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