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स्वास्थ्य मंत्री के निजी अस्पताल में भर्ती कराये जाने को लेकर उठने लगे सवाल
भुवनेश्वर। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री नव किशोर दास की इलाज के दौरान हुई मौत के बाद अंदरखाने सवाल उठने लगे हैं कि भुवनेश्वर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) पर क्यों नहीं भरोसा किया गया। आखिर ऐसी क्या परिस्थितियां थीं कि एक ऐसे निजी अपोलो अस्पताल में दाखिल करना पड़ा जहां कुछ नहीं था। यहां तक कि आवश्यक चिकित्सकों को भी बाहर से बुलाना पड़ा था। हालांकि इस पर कोई भी कुछ कहने के लिए तैयार नहीं, क्योंकि खबर है कि यह व्यवस्था एक बड़ी टीम की निगरानी की गयी थी।
हालांकि राज्य में सभी जानते हैं कि एम्स अब तक पूरी तरह से स्थापित हो गया है। यहां वे सभी व्यवस्थाएं उपलब्ध हैं, जिसकी जरूरत नव किशोर दास के इलाज के लिए आवश्यक थी। यहां पर इन हाउस चिकित्सक भी एक से बढ़कर उपलब्ध हैं। ऑपरेशन थिएटर भी उन्नत है और पोस्टमार्टम की व्यवस्था भी यहां है, जबकि नव किशोर दास के शव को पोस्टमार्टम के लिए कैपिटल अस्पताल में ले जाना पड़ा था। इस बात को लेकर चर्चा और जोर पकड़ने लगी है कि नव किशोर दास को एक ऐसे निजी अस्पताल में क्यों ले जाना पड़ा, जहां पोस्टमार्टम के लिए भी व्यवस्था नहीं है।
उल्लेखनीय है कि देश में चिकित्सा व्यवस्था में एम्स की पोजिशन नंबर वन पर है। कई मामलों में देखने को मिला है कि एम्स भुवनेश्वर ने दुर्लभ से दुर्लभ ऑपरेशन में सफलता हासिल की है, लेकिन स्वास्थ्य मंत्री को एम्स नहीं ले जाना सरकारी कर्मचारियों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा कर रहा है। सवाल उठ रहा है कि क्या सरकार को ही सरकारी व्यवस्था और उनके कर्मचारियों पर भरोसा नहीं है।
हालांकि इधर, विश्वसनीय सूत्रों ने बताया कि एम्स को भी फोन किया गया और उनको तैयार रहने के लिए कहा गया था, लेकिन अचानक नव किशोर दास को राजधानी स्थित एक निजी अस्पताल में दाखिल करा दिया गया।
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