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ओडिशा को नवीकरणीय ऊर्जा का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में तेजी : सिंहदेव

  •     भारत नवीकरणीय ऊर्जा शिखर सम्मेलन में उपमुख्यमंत्री ने वैश्विक निवेशकों और उद्योग जगत को ओडिशा में निवेश का दिया आमंत्रण

भुवनेश्वर। ओडिशा को नवीकरणीय ऊर्जा और हरित औद्योगिक विकास का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने निवेश आकर्षित करने के प्रयास तेज कर दिए हैं। उपमुख्यमंत्री कनक वर्धन सिंहदेव ने नई दिल्ली में आयोजित भारत नवीकरणीय ऊर्जा शिखर सम्मेलन एवं प्रदर्शनी (बीआरईएसई) 2026 में वैश्विक निवेशकों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों को ओडिशा के ऊर्जा क्षेत्र में निवेश के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के नेतृत्व में राज्य औद्योगिक क्षमता, विश्वस्तरीय आधारभूत ढांचे, स्थिर नीतियों और प्रगतिशील सुधारों के माध्यम से स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में नई पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

सिंहदेव ने कहा कि ओडिशा में नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन, ऊर्जा भंडारण, हरित हाइड्रोजन और आधुनिक विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में निवेश की व्यापक संभावनाएं हैं। राज्य सरकार का लक्ष्य स्वच्छ ऊर्जा के विस्तार के साथ-साथ टिकाऊ औद्योगिक विकास को गति देना और भविष्य की ऊर्जा जरूरतों के लिए मजबूत व्यवस्था तैयार करना है। उन्होंने निवेशकों से इस परिवर्तनकारी यात्रा में भागीदार बनने का आह्वान किया।

उपमुख्यमंत्री के अनुसार, भारत नवीकरणीय ऊर्जा शिखर सम्मेलन के दौरान ओडिशा को 18 समझौता ज्ञापनों के माध्यम से कुल 1,17,557 करोड़ रुपये के संभावित निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इन प्रस्तावों से विभिन्न नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्रों में लगभग 11,742 मेगावाट की अतिरिक्त क्षमता विकसित होने की संभावना है। उन्होंने कहा कि इन प्रस्तावों से ओडिशा में स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन के साथ नई औद्योगिक गतिविधियों, तकनीकी नवाचार और रोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा मिल सकता है। राज्य की भौगोलिक स्थिति, प्राकृतिक संसाधन, औद्योगिक आधार और बेहतर संपर्क व्यवस्था निवेशकों के लिए अनुकूल परिस्थितियां उपलब्ध कराती हैं।

ओडिशा पवेलियन में दिखीं निवेश की संभावनाएं

सिंहदेव ने मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के साथ भारत नवीकरणीय ऊर्जा शिखर सम्मेलन में ओडिशा और नीदरलैंड के पवेलियन का उद्घाटन किया। ओडिशा पवेलियन में राज्य की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता, रणनीतिक भौगोलिक स्थिति, नीतिगत व्यवस्था, आधारभूत सुविधाओं और उभरते हरित क्षेत्रों में उपलब्ध अवसरों को प्रदर्शित किया गया। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि निवेशकों और उद्योग प्रतिनिधियों की उत्साहजनक प्रतिक्रिया राज्य की स्वच्छ ऊर्जा संबंधी योजनाओं में बढ़ते भरोसे को दर्शाती है।

उन्होंने कहा कि ओडिशा केवल स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन को अपनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की ऊर्जा सुरक्षा, नवाचार, आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की तैयारी कर रहा है। राज्य सरकार नवीकरणीय ऊर्जा और टिकाऊ औद्योगिक विकास के क्षेत्र में ओडिशा को राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

गर्मी में 6,242 मेगावाट बिजली मांग पूरी करने का दावा

उपमुख्यमंत्री कनक वर्धन सिंहदेव ने राज्य की बिजली व्यवस्था की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि ओडिशा ने गर्मी के मौसम में लगभग 6,242 मेगावाट की अधिकतम बिजली मांग को बिना निर्धारित बिजली कटौती के पूरा किया।

उन्होंने राज्य में पंप्ड स्टोरेज, फ्लोटिंग सोलर और पवन ऊर्जा की व्यापक संभावनाओं के साथ गोपालपुर और पारादीप में ग्रीन हाइड्रोजन तथा ग्रीन अमोनिया केंद्र विकसित करने की योजनाओं की जानकारी दी।

2030 तक 10.96 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा का लक्ष्य

केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के सचिव संतोष कुमार षाड़ंगी ने बताया कि ओडिशा नवीकरणीय ऊर्जा नीति-2022 के तहत राज्य ने वर्ष 2030 तक 10.96 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता विकसित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

उन्होंने कहा कि 30 सितंबर 2026 तक ओडिशा की स्थापित नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 3,641.23 मेगावाट पहुंच चुकी थी। राज्य के ऊर्जा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव विशाल देव ने निवेशकों के सामने नीतिगत प्रावधानों, परियोजनाओं की मंजूरी और पंप्ड स्टोरेज, फ्लोटिंग सोलर तथा बैटरी ऊर्जा भंडारण से जुड़े अवसरों की जानकारी रखी।

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