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साल 2036 तक ओडिशा बनेगा ग्रीन एनर्जी हब

  •     भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट में 1.17 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिले

  •     18 समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हुआ हस्ताक्षर

  •     ग्रीन एनर्जी हब बनाने के राज्य सरकार के लक्ष्य को केंद्र का पूरा सहयोग : प्रह्लाद जोशी

  •     2030 तक 10.96 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य

भुवनेश्वर। ओडिशा साल 2036 तक ग्रीन एनर्जी हब बनने की ओर अग्रसर हो चुका है। भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट के दौरान ओडिशा को 18 समझौता ज्ञापनों (एमओयू) के माध्यम से लगभग 1.17 लाख करोड़ रुपये के संभावित निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इन प्रस्तावों से करीब 11.7 गीगावाट अतिरिक्त ऊर्जा उत्पादन क्षमता विकसित होने की संभावना है।

इन निवेश प्रस्तावों में पंप्ड स्टोरेज, सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, हाइब्रिड परियोजनाएं, बैटरी भंडारण, ग्रीन हाइड्रोजन, ग्रीन अमोनिया और ग्रीन डेटा सेंटर जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

मुख्यमंत्री ने राज्य के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया

मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने इसे राज्य के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए निवेशकों से ओडिशा के विकास में भागीदार बनने का आह्वान किया। उन्होंने ओडिशा को देश के पांच प्रमुख बिजली निर्यातक राज्यों में शामिल करने और पूर्वी भारत का स्वच्छ ऊर्जा केंद्र बनाने का लक्ष्य भी सामने रखा।

प्रह्लाद जोशी ने दिया सहयोग का भरोसा

केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने ओडिशा को वर्ष 2036 तक देश का प्रमुख ग्रीन एनर्जी हब बनाने के राज्य सरकार के लक्ष्य का समर्थन करते हुए केंद्र की ओर से हरसंभव सहयोग का भरोसा दिया है। एक्सपो में आयोजित ओडिशा राज्य सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि ओडिशा में सौर, पवन, पंप्ड स्टोरेज और ग्रीन हाइड्रोजन ऊर्जा के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। राज्य सरकार ने वर्ष 2030 तक 10.96 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा है।

मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी और उपमुख्यमंत्री कनक वर्धन सिंहदेव की उपस्थिति में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ओडिशा अपनी मौजूदा संभावनाओं से कहीं अधिक उपलब्धि हासिल कर सकता है।

छतों पर सौर ऊर्जा लगाने में देश में सातवें स्थान पर ओडिशा

केंद्रीय मंत्री ने सौर ऊर्जा को किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र की लागत कम करने का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री कुसुम योजना के माध्यम से सिंचाई खर्च कम करने के साथ किसानों के लिए अतिरिक्त आय के अवसर भी तैयार हो रहे हैं।

ओडिशा में प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत छतों पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने के मामले में राज्य देश में सातवें स्थान पर पहुंच गया है। राज्य में अब तक 1.74 लाख से अधिक रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापित किए जा चुके हैं, जबकि इस योजना के तहत 3.12 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं। केंद्र और राज्य सरकार की संयुक्त सब्सिडी से घरेलू उपभोक्ताओं के बीच सौर ऊर्जा को अपनाने की प्रवृत्ति बढ़ी है।

प्रधानमंत्री कुसुम योजना के तहत भी ओडिशा में लगभग 18,441 स्वीकृत सौर पंपों में से करीब 15,780 स्थापित किए जा चुके हैं। हालांकि, ग्रिड से जुड़े घटकों के क्रियान्वयन में अभी तेजी लाने की जरूरत है।

पंप्ड स्टोरेज और समुद्री पवन ऊर्जा में अपार संभावनाएं

ओडिशा में नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन के लिए प्राकृतिक संसाधनों की व्यापक उपलब्धता है। राज्य में लगभग 49 गीगावाट पंप्ड स्टोरेज ऊर्जा की संभावना आंकी गई है। इसके अलावा जलाशयों में 12 गीगावाट से अधिक फ्लोटिंग सोलर, समुद्र तटीय क्षेत्रों में 12 गीगावाट से अधिक पवन ऊर्जा तथा ग्रीन हाइड्रोजन और ग्रीन अमोनिया उत्पादन की भी व्यापक संभावनाएं हैं।

ऊर्जा क्षेत्र के इस विस्तार को मजबूत बनाने के लिए मुख्यमंत्री शक्ति विकास योजना के तहत 19,348 करोड़ रुपये की लागत से बिजली ग्रिड के विस्तार का काम किया जा रहा है। इसके साथ ही राज्य में डेढ़ लाख रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापित करने के लिए यूटिलिटी आधारित एग्रीगेशन मॉडल की पहल भी की गई है।

भारत को वैश्विक सौर ऊर्जा नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ाने पर जोर

केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने भारत की वैश्विक सौर ऊर्जा क्षेत्र में बढ़ती भूमिका का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि भारत को लगातार तीसरी बार अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए) का अध्यक्ष चुना गया है। यह उपलब्धि ‘एक सूर्य, एक विश्व, एक ग्रिड’ की परिकल्पना को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण है।

उन्होंने किसानों तक सौर ऊर्जा पहुंचाने के लिए तीन लाख नहीं, बल्कि 30 लाख किसानों को सौर ऊर्जा और कृषि-फोटोवोल्टिक मॉडल से जोड़ने के प्रयासों का भी उल्लेख किया।

5 नवंबर तक चलेगा भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2 नवंबर को भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट-2026 का उद्घाटन किया था। ‘निवेश करें, नवाचार करें और प्रेरित करें’ थीम पर आयोजित यह सम्मेलन 5 नवंबर तक चलेगा। इसमें 13 राज्य अपनी नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र की संभावनाओं और निवेश अवसरों को प्रस्तुत कर रहे हैं।

मोहन माझी ने नीदरलैंड पवेलियन का भी उद्घाटन किया

ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी और उपमुख्यमंत्री कनक वर्धन सिंह देव ने समिट में ओडिशा पवेलियन का उद्घाटन किया। इस अवसर पर दोनों नेताओं ने नीदरलैंड पवेलियन का भी उद्घाटन किया। इसके बाद ग्रिडको लिमिटेड के प्रबंध निदेशक डॉ सत्यप्रिय रथ ने संबंधित कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान किया।

ओडिशा से एमओयू करने वाली कंपनियां

इन समझौतों में हिंदुजा रिन्यूएबल्स एनर्जी, रिन्यू ग्रीन, शिवालय कंस्ट्रक्शन, सुजलॉन रिन्यूएबल डेवलपमेंट, मेघमणि रिन्यू एनर्जी, एवरग्रीन रिन्यूएबल्स, दत्ता पावर इंफ्रा, सीडी हाइड्रो, जीएसपी इंफ्रा, विरुधाका रिन्यूएबल एनर्जी, मैकलेक टेक्निकल प्रोजेक्ट लैबोरेटरी, फेनिस हाइड्रोजन, रवि रिन्यूएबल्स, एक्सपर्टनेस्ट और इंडिया एनर्जी स्टोरेज एलायंस सहित अन्य कंपनियां शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि पारादीप, धामरा और गोपालपुर जैसे रणनीतिक बंदरगाहों के कारण ओडिशा में स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन और निर्यात की व्यापक संभावनाएं हैं।

देश-विदेश की बड़ी कंपनियों ने दिखाई रुचि

समिट में एनएलसी इंडिया, अडाणी पोर्ट्स एंड एसईजेड, अवाडा ग्रुप, ग्रीनको ग्रुप, एसीएमई ग्रुप, एवरेन और ब्रुकफील्ड रिन्यूएबल्स जैसी प्रमुख कंपनियों एवं निवेशकों की भागीदारी ने ओडिशा के स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में बढ़ती दिलचस्पी को रेखांकित किया।

समिट में केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी, मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, उपमुख्यमंत्री कनक वर्धन सिंहदेव, मंत्रालय के सचिव संतोष कुमार षाड़ंगी और राज्य के ऊर्जा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव विशाल देव सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। ओडिशा राज्य सत्र में 900 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

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