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सात जिले अलर्ट के साथ प्रशासन ने तेज की तैयारियां
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उपमुख्यमंत्री एवं राजस्व मंत्री सुरेश पुजारी ने बताया संभावित तूफान का मार्ग
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पांच जिलों में उच्चतम सतर्कता, दो जिलों में दूसरे स्तर की तैयारी
भुवनेश्वर। बंगाल की खाड़ी में विकसित हो रहे संभावित चक्रवाती तूफान को देखते हुए ओडिशा सरकार ने आपदा प्रबंधन की तैयारियां तेज कर दी हैं। राज्य के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने संभावित तूफान के मार्ग, बारिश से प्रभावित होने वाले क्षेत्रों और प्रशासनिक तैयारियों की जानकारी दी है। राज्य सरकार के अनुमान के अनुसार, चक्रवाती तूफान पहले आंध्र प्रदेश के तट से टकरा सकता है और इसके बाद ओडिशा के विभिन्न क्षेत्रों में भारी बारिश का असर देखने को मिल सकता है।
पांच जिलों में उच्चतम सतर्कता, दो जिलों में विशेष तैयारी
राज्य सरकार ने संभावित प्रभाव को देखते हुए जिलों को अलग-अलग श्रेणियों में रखकर तैयारी करने के निर्देश दिए हैं। गंजाम, गजपति, कोरापुट, रायगड़ा और मालकानगिरि को उच्चतम सतर्कता वाली पहली श्रेणी में रखा गया है। वहीं, कंधमाल और कलाहांडी में दूसरी श्रेणी के तहत तैयारियां की जा रही हैं।
इन जिलों में बारिश की स्थिति पर लगातार नजर रखने, राहत एवं बचाव व्यवस्था तैयार रखने और जरूरत पड़ने पर प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए प्रशासन को सतर्क रहने को कहा गया है।
इसके बाद मौसम प्रणाली के छत्तीसगढ़ से झारखंड की ओर बढ़ने की संभावना के बीच उत्तरी ओडिशा के मयूरभंज और बालेश्वर जैसे जिलों में भी बारिश का असर पड़ने की आशंका जताई गई है। हालांकि, तूफान की वास्तविक दिशा और प्रभाव को लेकर मौसम विभाग के नवीनतम पूर्वानुमान महत्वपूर्ण होंगे।
महानदी में बढ़ सकता है जलस्तर
छत्तीसगढ़ में भारी बारिश की आशंका को देखते हुए महानदी बेसिन में पानी का प्रवाह बढ़ने की संभावना है। इसे ध्यान में रखते हुए जल संसाधन विभाग ने एहतियाती कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। संभावित जलप्रवाह और जलस्तर की स्थिति पर नजर रखते हुए आवश्यकतानुसार पानी छोड़ने की प्रक्रिया के लिए तैयारी की जा रही है, ताकि निचले क्षेत्रों में संभावित जोखिम को नियंत्रित किया जा सके।
वरिष्ठ अधिकारियों की छुट्टियां रद्द, मुख्यालय में रहने का निर्देश
चक्रवात की आशंका के बीच ओडिशा सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था को पूरी तरह सक्रिय रखने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों को मुख्यालय में उपस्थित रहने का निर्देश दिया है। अतिरिक्त मुख्य सचिवों, प्रमुख सचिवों और आयुक्तों को मुख्यालय नहीं छोड़ने को कहा गया है।
सामान्य प्रशासन एवं लोक शिकायत विभाग की ओर से जारी निर्देश के तहत सभी जिलाधिकारियों और कलेक्टरों सहित महत्वपूर्ण पदों पर तैनात अधिकारियों की छुट्टियां तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी गई हैं। सरकार के विशेष सचिव घासीराम मुर्मू ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि छुट्टी पर गए अधिकारी जल्द से जल्द अपने मुख्यालय लौटें।
इस कदम का उद्देश्य किसी भी आपात स्थिति में राहत एवं बचाव कार्यों का समन्वय, जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना और प्रशासनिक कार्रवाई में तेजी सुनिश्चित करना है।
शून्य जनहानि का लक्ष्य, राहत दल तैयार
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने कहा है कि राज्य सरकार संभावित आपदा से निपटने के लिए तैयार है और उसका लक्ष्य शून्य जनहानि सुनिश्चित करना है। ओडिशा आपदा त्वरित कार्रवाई बल (ओड्राफ) और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की टीमों को तैयार रखा गया है। संवेदनशील क्षेत्रों में चक्रवात आश्रय स्थलों और अन्य राहत व्यवस्थाओं की भी तैयारी की जा रही है।
प्रशासन ने मछुआरों को समुद्र में नहीं जाने की सलाह दी है। साथ ही, संवेदनशील क्षेत्रों के लोगों से मौसम विभाग की आधिकारिक चेतावनियों का पालन करने, प्रशासन के निर्देशों का सहयोग करने और संभावित भारी बारिश को देखते हुए सतर्क रहने की अपील की गई है।
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि मौसम प्रणाली की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। आने वाले दिनों में बारिश और हवा की तीव्रता को लेकर मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
ओडिशा के पांच जिलों में रेड अलर्ट, स्कूल रहेंगे बंद
संभावित भारी बारिश को देखते हुए गंजाम, गजपति, रायगड़ा, कोरापुट और मालकानगिरि में विशेष सतर्कता बरती जा रही है। इन जिलों के लिए जारी चेतावनी के अनुसार, कुछ क्षेत्रों में 20 सेंटीमीटर से अधिक बारिश हो सकती है। सतही हवा की गति 70 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की आशंका भी जताई गई है।
प्रशासन ने इन पांच जिलों में 28 और 29 अक्टूबर को शैक्षणिक संस्थानों को बंद रखने का निर्देश दिया है। हालांकि, स्कूलों और अन्य संस्थानों से संबंधित आदेशों की स्थानीय स्तर पर पुष्टि आवश्यक है।
गंजाम में 100 चक्रवात आश्रय स्थल तैयार
गंजाम जिले में प्रशासन ने 100 चक्रवात आश्रय स्थलों को तैयार किया है और जरूरत पड़ने पर लोगों को ठहराने के लिए 1,000 अतिरिक्त स्थानों की पहचान की गई है। चिकित्सा केंद्रों में आपातकालीन दवाओं और सर्पदंश के उपचार में इस्तेमाल होने वाली दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। किसानों को खड़ी फसलों की सुरक्षा के लिए भी आवश्यक सावधानियां बरतने की सलाह दी गई है।
सरकार का इन पर है फोकस
कमजोर परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी: कच्चे मकानों, फूस की झोपड़ियों और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की पहचान कर उन्हें सुरक्षित चक्रवात आश्रय स्थलों में पहुंचाया जा रहा है।
गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष व्यवस्था: जिन गर्भवती महिलाओं के प्रसव की तारीख नजदीक है, उन्हें पहले से नजदीकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी), प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) और अस्पतालों में स्थानांतरित किया जा रहा है।
बुजुर्गों, बच्चों और दिव्यांगों पर विशेष ध्यान: वरिष्ठ नागरिकों, बच्चों और दिव्यांग व्यक्तियों की सुरक्षा के लिए अलग से आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं।
समुद्र में मछली पकड़ने पर प्रतिबंध: चक्रवात के खतरे को देखते हुए समुद्र में मछली पकड़ने की गतिविधियों पर पूरी तरह रोक लगाई गई है।
पर्यटन स्थलों पर प्रवेश प्रतिबंधित: पांचों संवेदनशील जिलों में पहाड़ियों, झरनों, बांधों और अन्य प्राकृतिक पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों के प्रवेश पर रोक लगाई गई है।
किसानों को फसल सुरक्षित रखने की सलाह: कृषि विभाग ने किसानों को 80 से 85 प्रतिशत तक पक चुकी धान, मक्का, रागी और अन्य फसलों की कटाई कर उन्हें सुरक्षित स्थानों पर रखने की सलाह दी है। किसानों की सहायता के लिए विशेष कृषि हेल्पलाइन भी शुरू की गई हैं।
स्वास्थ्य सेवाओं को तैयार रखने के निर्देश: अस्पतालों में आवश्यक दवाओं, सर्पदंशरोधी दवाओं और क्लोरीन की गोलियों का पर्याप्त भंडार रखने की व्यवस्था की गई है। पेयजल की क्लोरीनीकरण प्रक्रिया सुनिश्चित करने के साथ बिजली और दूरसंचार सेवाओं को शीघ्र बहाल करने के लिए आवश्यक उपकरण भी तैयार रखे गए हैं।
पशुधन की सुरक्षा के इंतजाम: प्रभावित क्षेत्रों में पशुओं को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने, मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयों के माध्यम से उपचार उपलब्ध कराने तथा चारा और पशु आहार वितरित करने की व्यवस्था की गई है।
अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय: संवेदनशील क्षेत्रों और महत्वपूर्ण व्यवस्थाओं के लिए नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। अधिकारियों को समर्पित व्हाट्सऐप समूहों के माध्यम से जोड़ा गया है, ताकि वास्तविक समय में सूचनाओं का आदान-प्रदान और आवश्यक कार्रवाई की जा सके।
लोगों से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की अपील: प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे अफवाहों पर विश्वास न करें, केवल आधिकारिक चेतावनियों और निर्देशों का पालन करें तथा आपदा प्रबंधन में स्थानीय प्रशासन का सहयोग करें।
मछुआरों को समुद्र में नहीं जाने की सलाह
गहरे समुद्र में मौजूद मछुआरों को तत्काल तट पर लौटने की सलाह दी गई है। पुडुचेरी में भी लगातार बारिश की खबरों के बीच स्थानीय प्रशासन मौसम की स्थिति पर नजर रख रहा है।
पांच जिलों में ओड्राफ और एनडीआरएफ की 30 टीमें तैनात
- गंजाम: ओड्राफ की 9 और एनडीआरएफ की 2 टीमें, कुल 11 टीमें तैनात की गई हैं।
- गजपति: ओड्राफ की 6 और एनडीआरएफ की 1 टीम, कुल 7 टीमें तैनात हैं।
- रायगड़ा: ओड्राफ की 3 और एनडीआरएफ की 1 टीम, कुल 4 टीमें तैनात हैं।
- कोरापुट: ओड्राफ की 3 और एनडीआरएफ की 1 टीम, कुल 4 टीमें तैनात हैं।
- मालकानगिरि: ओड्राफ की 3 और एनडीआरएफ की 1 टीम, कुल 4 टीमें तैनात हैं।
खुर्दा में सरकारी कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द
बंगाल की खाड़ी में विकसित हो रहे चक्रवाती तूफान की आशंका को देखते हुए ओडिशा के खुर्दा जिला प्रशासन ने आपदा प्रबंधन की तैयारियां तेज कर दी हैं। जिला प्रशासन ने 26 से 31 अक्टूबर तक सभी सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर दी हैं। इस संबंध में आदेश जारी किया गया है।
जिलाधिकारी एवं जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अध्यक्ष अमृत ऋतुराज की ओर से जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि प्रशासनिक आवश्यकता और बंगाल की खाड़ी में विकसित हो रही चक्रवाती स्थिति को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को अपने निर्धारित मुख्यालय में उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है। सक्षम प्राधिकारी की स्पष्ट अनुमति के बिना कोई भी अधिकारी या कर्मचारी मुख्यालय नहीं छोड़ सकेगा।
आदेश के अनुसार, पहले से स्वीकृत छुट्टियां भी रद्द कर दी गई हैं। वर्तमान में अवकाश पर चल रहे तथा मुख्यालय छोड़ने की अनुमति लेकर बाहर गए कर्मचारियों को तत्काल अपने कार्यस्थल पर लौटने का निर्देश दिया गया है। आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।
आपदा प्रबंधन की तैयारियों को प्राथमिकता
चक्रवाती तूफान की आशंका के मद्देनजर खुर्दा जिले में प्रशासनिक व्यवस्था को पूरी तरह सक्रिय रखने पर जोर दिया जा रहा है। जिला प्रशासन ने चौबीस घंटे संचालित नियंत्रण कक्ष, चक्रवात आश्रय स्थलों की तैयारी, नौकाओं की उपलब्धता तथा खाद्य सामग्री और चिकित्सा सुविधाओं की व्यवस्था की समीक्षा की है। जिले में 51 चक्रवात आश्रय स्थलों और 379 अतिरिक्त आश्रय स्थलों की तैयारी का भी उल्लेख किया गया है।
जिलाधिकारी का आदेश अतिरिक्त जिलाधिकारियों, प्रखंड विकास अधिकारियों, तहसीलदारों तथा शहरी स्थानीय निकायों के अधिकारियों को तत्काल अनुपालन के लिए भेजा गया है। प्रशासन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि चक्रवात या भारी बारिश की स्थिति में राहत, बचाव और आवश्यक सेवाओं में किसी प्रकार की बाधा न आए।
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे मौसम विभाग की आधिकारिक चेतावनियों का पालन करें, अनावश्यक यात्रा से बचें और आपात स्थिति के लिए आवश्यक तैयारियां रखें।
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