-
ओडिशा में प्रकाशन क्षेत्र में बढ़ती अशुद्धियों पर चिंता
-
लेखकों, प्रकाशकों और पत्रकारों से पहल करने की अपील
भुवनेश्वर। अध्यापिका निहारिका दास स्मृति न्यास ने प्रत्येक वर्ष 14 दिसंबर को राष्ट्रीय प्रूफ-संशोधन दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की है। न्यास पिछले दो वर्षों से ओड़िया भाषा के उत्कृष्ट प्रूफ-संशोधकों को सम्मानित करता आ रहा है। इस पहल का उद्देश्य प्रकाशन क्षेत्र में प्रूफ-संशोधन के महत्व को रेखांकित करना तथा पुस्तकों और अन्य प्रकाशित सामग्री में भाषाई अशुद्धियों को दूर करने के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।
न्यास के संयोजक दीपक कुमार महांता ने स्थानीय रेडक्रॉस भवन में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि विकसित देशों में प्रूफ-संशोधन को प्रकाशन प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है और इस पर विशेष ध्यान दिया जाता है। इसके विपरीत, भारत, विशेषकर ओडिशा में, प्रूफ-संशोधन की उपेक्षा के कारण प्रकाशन क्षेत्र में गंभीर समस्याएं सामने आ रही हैं।
उन्होंने कहा कि राज्य में पुस्तकों, यहां तक कि पाठ्यपुस्तकों में भी बड़ी संख्या में भाषाई और मुद्रण संबंधी त्रुटियां देखने को मिल रही हैं। उचित प्रूफ-संशोधन के अभाव में प्रकाशित सामग्री की गुणवत्ता प्रभावित होती है, जिससे पाठकों के बीच गलत जानकारी पहुंचने और भाषा की शुद्धता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका रहती है।
महात्मा गांधी भी मुद्रण संबंधी त्रुटियों से थे व्यथित
प्रूफ-संशोधन के महत्व को स्पष्ट करते हुए महांता ने महात्मा गांधी से जुड़ी एक घटना का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि गोपालकृष्ण गोखले के शिक्षा संबंधी लेखों का गुजराती भाषा में अनुवाद प्रकाशित कर उसकी प्रतियां महात्मा गांधी के पास प्रस्तावना लिखने के लिए भेजी गई थीं। लेकिन उचित प्रूफ-संशोधन नहीं होने के कारण उन प्रतियों में अनेक त्रुटियां रह गई थीं।
इन अशुद्धियों से गांधीजी काफी व्यथित हुए थे और उन्होंने त्रुटिपूर्ण मुद्रित पृष्ठों को जला देने का निर्देश दिया था। इस घटना का उल्लेख करते हुए महांता ने कहा कि किसी भी पुस्तक के प्रकाशन में भाषाई शुद्धता और प्रूफ-संशोधन की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।
भारतीय भाषाओं में अशुद्धियों पर जताई चिंता
महांता ने कहा कि अमेरिका में प्रूफ-संशोधन के महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए प्रत्येक वर्ष 8 मार्च को राष्ट्रीय प्रूफरीडिंग दिवस मनाया जाता है। इसके विपरीत, भारत में इस कार्य को अपेक्षित महत्व नहीं मिलने के कारण भारतीय भाषाओं में प्रकाशित पुस्तकों और अन्य सामग्री में वर्तनी तथा मुद्रण संबंधी त्रुटियां बढ़ रही हैं।
उन्होंने कहा कि प्रूफ-संशोधन को प्रकाशन प्रक्रिया का अनिवार्य हिस्सा बनाने से लेखन की शुद्धता सुनिश्चित की जा सकती है और भाषाओं के समक्ष उत्पन्न चुनौतियों से निपटने में मदद मिल सकती है।
लेखकों, प्रकाशकों और पत्रकारों से सहयोग की अपील
अध्यापिका निहारिका दास स्मृति न्यास ने लेखकों, प्रकाशकों, पत्रकारों और पुस्तक प्रेमियों से अपील की है कि वे प्रत्येक वर्ष 14 दिसंबर को राष्ट्रीय प्रूफ-संशोधन दिवस के रूप में मनाने की पहल में सहयोग करें।
न्यास का मानना है कि इस दिवस के आयोजन से प्रूफ-संशोधन के प्रति जागरूकता बढ़ेगी, प्रकाशन की गुणवत्ता में सुधार होगा तथा भारतीय भाषाओं में शुद्ध और त्रुटिरहित सामग्री उपलब्ध कराने के प्रयासों को प्रोत्साहन मिलेगा।
संवाददाता सम्मेलन में पूर्वांचल भाषा केंद्र के पूर्व निदेशक डॉ अरविंद पटनायक, वरिष्ठ दार्शनिक डॉ नारायण महांती, आचार्य हरिहर महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य डॉ पवित्र कुमार रथ तथा व्यंग्यकार एवं स्तंभकार राधाश्याम राउल उपस्थित थे।
Indo Asian Times A Hindi Digital News Portal
