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न्यूट्रिनो ब्रह्मांड के सबसे महान दूत हैं : डॉ अग्रवाल

  • भारतीय भौतिकी शिक्षक संघ के तत्वावधान में ‘न्यूट्रिनो एस्ट्रोनॉमी’ पर संगोष्ठी आयोजित

भुवनेश्वर। भारतीय भौतिकी शिक्षक संघ के तत्वावधान में कटक स्थित श्रीरामचंद्र भवन में ‘न्यूट्रिनो एस्ट्रोनॉमी’ विषय पर एक संगोष्ठी आयोजित की गई। इस अवसर पर इस वर्ष नोबेल पुरस्कार से सम्मानित प्रोफेसर फ्रांसिस हाल्जेन के साथ काम कर चुके भारतीय वैज्ञानिक प्रोफेसर संजीव कुमार अग्रवाल ने मुख्य वक्ता के रूप में भाग लिया और भौतिकी के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार-2026 से संबंधित विषयों पर प्रकाश डाला। प्रोफेसर अग्रवाल ने न्यूट्रिनो के महत्व, ब्रह्मांड के रहस्यों को समझने में इसकी भूमिका और भौतिकी के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार-2026 से जुड़े विषयों पर प्रकाश डाला।

प्रो अग्रवाल ने कहा कि प्रकाश कण फोटॉन के बाद न्यूट्रिनो ब्रह्मांड में सबसे अधिक मात्रा में पाए जाने वाले कणों में शामिल हैं। उन्होंने बताया कि न्यूट्रिनो विद्युत आवेश रहित और अत्यंत कम द्रव्यमान वाले कण हैं। पदार्थ के साथ इनकी अत्यंत कमजोर अंतःक्रिया के कारण ये सामान्यतः अपने मार्ग में अवशोषित नहीं होते। जहां प्रकाश अपने रास्ते में अवशोषित या बिखर सकता है, वहीं न्यूट्रिनो लंबी दूरी तय करते हुए अपने स्रोत से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी लेकर आते हैं।

उन्होंने कहा कि न्यूट्रिनो के अध्ययन से ब्रह्मांड के दूरस्थ क्षेत्रों और वहां होने वाली घटनाओं के बारे में जानकारी प्राप्त की जा सकती है। अंटार्कटिका में स्थित ‘आइसक्यूब’ न्यूट्रिनो वेधशाला बर्फ में न्यूट्रिनो से उत्पन्न संकेतों का अध्ययन करती है। इसके माध्यम से वैज्ञानिक न्यूट्रिनो के स्रोतों का पता लगाने और ब्रह्मांड की विभिन्न घटनाओं को समझने का प्रयास कर रहे हैं।

प्रो अग्रवाल ने बताया कि इस परियोजना के विकास में प्रोफेसर फ्रांसिस हाल्जेन की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने प्रो हाल्जेन के साथ काम करने के अपने अनुभवों का भी उल्लेख किया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि तथा संगठन की प्रांतीय कार्यकारिणी के सदस्य प्रोफेसर लंबोदर प्रसाद सिंह ने विषय पर संक्षिप्त जानकारी देते हुए न्यूट्रिनो खगोल विज्ञान के वैज्ञानिक महत्व को रेखांकित किया। संगठन की अध्यक्ष प्रोफेसर रीता पैकराय ने स्वागत भाषण दिया, जबकि संगठन के सचिव डॉ. गौरीशंकर साहू ने अतिथियों का सम्मान किया। कार्यक्रम के अंत में कलाबिलास सांस्कृतिक परिषद के उपाध्यक्ष सौभाग्य स्वाईं ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

संगोष्ठी में आईआईएसईआर कोलकाता के पूर्व निदेशक प्रोफेसर प्रशांत कुमार पाणिग्राही, ओडिशा राज्य उच्च शिक्षा परिषद के उपाध्यक्ष प्रोफेसर बंशीधर माझी, वैज्ञानिक देव साहू, डॉ युधिष्ठिर साहू, प्रोफेसर किशोर कुमार दास, डॉ बिकली चरण दास, डॉ. राजश्री महापात्र, अध्यापक मनोरंजन महांति, अध्यापक प्रसन्न स्वाईं, कवि ब्रह्मानंद बिश्वाल, डॉ सचिन्द्र राउल और डॉ अजीत प्रसाद राउत सहित सौ से अधिक लोग उपस्थित रहे।

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