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चक्रवात से 30 जिलों में शून्य जनहानि का लक्ष्य

  •     3,000 से अधिक गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी

भुवनेश्वर। बंगाल की खाड़ी में तेजी से शक्तिशाली हो रहा चक्रवाती तूफान ‘अर्णव’ ओडिशा के लिए चिंता का कारण बन गया है। इसके प्रभाव से दक्षिण ओडिशा में तेज हवाओं के साथ भारी से अत्यंत भारी बारिश हो सकती है। राज्य सरकार ने सभी 30 जिलों में एहतियाती उपाय तेज करते हुए शून्य जनहानि का लक्ष्य निर्धारित किया है।

फिलहाल चक्रवात गोपालपुर से लगभग 580 किलोमीटर दूर है और करीब 15 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पश्चिम दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसके केंद्र के आसपास हवा की निरंतर गति 65 से 75 किलोमीटर प्रति घंटे है, जबकि झोंकों की गति 85 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच रही है।

भुवनेश्वर मौसम विज्ञान केंद्र की निदेशक मनोरमा मोहंती के अनुसार, चक्रवात के बाहरी प्रभाव से दक्षिण ओडिशा में हवा की गति 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। हवा के झोंकों की गति 80 किलोमीटर प्रति घंटे तक रहने का अनुमान है।

ओडिशा में 27 अक्टूबर की शाम या रात से बारिश शुरू होने की संभावना है। 28 अक्टूबर को कुछ स्थानों पर भारी से अत्यंत भारी बारिश हो सकती है। तेज बारिश के कारण भूस्खलन, खेतों में जलभराव और फसलों को नुकसान पहुंचने का खतरा भी जताया गया है।

29 अक्टूबर को कमजोर पड़ने लगेगा तूफान

आईएमडी के महानिदेशक डॉ. मृत्युंजय महापात्र के अनुसार, आंध्र प्रदेश तट पार करने के बाद चक्रवाती प्रणाली धीरे-धीरे कमजोर पड़ सकती है। 29 अक्टूबर तक इसके डीप डिप्रेशन में बदलकर छत्तीसगढ़ की ओर बढ़ने का अनुमान है। इसके बाद 30 अक्टूबर की सुबह तक इसके और कमजोर होकर समाप्त होने की संभावना है।

हालांकि, तूफान का केंद्र ओडिशा से बाहर रहने का अनुमान है, लेकिन इसके बाहरी प्रभाव से राज्य के दक्षिणी जिलों में भारी बारिश और तेज हवाओं का खतरा बना रहेगा।

3,000 से अधिक गर्भवती महिलाओं की सुरक्षा पर विशेष ध्यान

चक्रवात से निपटने की तैयारियों की समीक्षा के लिए केंद्रीय कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में ओडिशा की मुख्य सचिव अनु गर्ग ने राज्य की तैयारियों की जानकारी दी। दक्षिण ओडिशा के पांच संवेदनशील जिलों में वरिष्ठ मंत्रियों और अधिकारियों को तैनात किया गया है। ऊर्जा और जल संसाधन विभागों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।

राज्य सरकार 3,000 से अधिक गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित स्थानों और अस्पतालों में पहुंचाने की तैयारी कर रही है, ताकि उन्हें समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा सके। तटरक्षक बल के समन्वय से समुद्र में मौजूद मछुआरों को सुरक्षित वापस लाने की व्यवस्था भी की गई है।

इसके अलावा, छत्तीसगढ़ सरकार के साथ समन्वय स्थापित करने के लिए विशेष दल बनाया गया है, जो बांधों के जलस्तर और संभावित जल निकासी पर नजर रखेगा। इससे भारी बारिश के दौरान निचले इलाकों में बाढ़ के खतरे से निपटने में मदद मिलेगी।

135 स्थायी और 1,600 अस्थायी चक्रवात आश्रय स्थल तैयार

विशेष राहत आयुक्त (एसआरसी) राजेश प्रभाकर पाटिल ने बताया कि राज्य में 135 स्थायी और 1,600 अस्थायी चक्रवात आश्रय स्थलों को तैयार रखा गया है। उन्होंने लोगों से घबराने के बजाय सतर्क रहने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की।

राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने कहा कि सभी 30 जिलों में सुरक्षा के व्यापक उपाय किए जा रहे हैं। सरकार की प्राथमिकता चक्रवात के दौरान जनहानि को शून्य रखना और संपत्ति तथा बुनियादी ढांचे को होने वाले नुकसान को न्यूनतम करना है।

एनडीआरएफ की 11 टीमें तैनात, ओड्राफ की 60 टीमें तैयार

आपदा से निपटने के लिए मुंडली से राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की 11 टीमें, जिनमें लगभग 360 कर्मी शामिल हैं, विभिन्न क्षेत्रों में भेजी गई हैं। इनमें से चार टीमें, कुल 140 कर्मियों के साथ, गजपति, रायगड़ा, मालकानगिरि और कोरापुट में तैनात हैं। तीन टीमें छत्तीसगढ़ और चार आंध्र प्रदेश में तैनात की गई हैं।

राज्य की आपदा त्वरित कार्रवाई बल (ओड्राफ) की 60 टीमें चरणबद्ध तरीके से तैनात की जा रही हैं, जिनमें से 20 टीमें फिलहाल सक्रिय हैं। गंजाम में नौ और गजपति में छह टीमें निर्धारित की गई हैं। रायगड़ा, कोरापुट और मालकानगिरि में तीन-तीन टीमें तैनात की गई हैं। नबरंगपुर समेत अन्य जिलों में भी आवश्यकतानुसार दल लगाए जा रहे हैं।

इसके अतिरिक्त, अग्निशमन सेवा की 225 टीमें विशेष बचाव उपकरणों के साथ तैयार रखी गई हैं। इनका उपयोग तूफान के दौरान सड़कों पर गिरे पेड़ों को हटाने, अवरुद्ध मार्गों को खोलने और तत्काल राहत एवं बचाव कार्यों के लिए किया जाएगा।

गंजाम के सभी समुद्र तट 30 अक्टूबर तक बंद

चक्रवात के खतरे को देखते हुए गंजाम जिला प्रशासन ने गोपालपुर और सोनापुर समेत जिले के सभी समुद्र तटों पर पर्यटकों और आम लोगों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया है। यह प्रतिबंध 26 अक्टूबर दोपहर 12 बजे से 30 अक्टूबर सुबह 10 बजे तक लागू रहेगा, जब तक प्रशासन कोई नया निर्देश जारी नहीं करता।

प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे मौसम विभाग और सरकार की आधिकारिक चेतावनियों पर ही भरोसा करें। संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले लोग सुरक्षित स्थानों पर जाने के निर्देशों का पालन करें और किसी भी आपात स्थिति में स्थानीय प्रशासन से संपर्क करें।

सभी 30 जिलों में माइक्रो प्लान लागू, मालकानगिरि रेड अलर्ट पर

बंगाल की खाड़ी में विकसित हो रहे चक्रवाती तूफान के खतरे को देखते हुए ओडिशा सरकार ने राज्य के सभी 30 जिलों में व्यापक माइक्रो प्लान लागू किया है। चक्रवात के असर से ओडिशा के सभी जिलों में बारिश होने की संभावना है। कई इलाकों में भारी बारिश का पूर्वानुमान है। राज्य सरकार ने मालकानगिरि को सबसे अधिक प्रभावित होने की आशंका वाला जिला बताते हुए वहां विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं।

राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने राज्य की तैयारियों की जानकारी देते हुए कहा कि संवेदनशील क्षेत्रों में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों और मंत्रियों को भेजा गया है। वे मौके पर रहकर राहत, सुरक्षा और आपातकालीन व्यवस्थाओं की निगरानी करेंगे, ताकि आवश्यकता पड़ने पर तत्काल कार्रवाई की जा सके।

जिला स्तर से राज्य मुख्यालय तक चौबीसों घंटे निगरानी

चक्रवात के संभावित प्रभाव से निपटने के लिए जिला स्तर से लेकर राज्य मुख्यालय तक चौबीसों घंटे सक्रिय नियंत्रण कक्ष स्थापित किए गए हैं। इनके माध्यम से मौसम की स्थिति, संभावित नुकसान और राहत-बचाव संबंधी गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जाएगी।

मंत्री सुरेश पुजारी ने कहा कि मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी संवेदनशील क्षेत्रों में पहुंच चुके हैं, जिससे स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार तुरंत निर्णय लिए जा सकें। सरकार का उद्देश्य प्रभावित क्षेत्रों में समय पर सहायता पहुंचाना और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

छत्तीसगढ़ में बारिश से महानदी में बढ़ सकता है जलस्तर

राज्य सरकार ने चक्रवात के साथ-साथ उससे उत्पन्न होने वाले संभावित द्वितीयक खतरों, विशेषकर नदियों में बाढ़ की स्थिति, पर भी ध्यान केंद्रित किया है। मंत्री ने बताया कि छत्तीसगढ़ में होने वाली बारिश का असर ओडिशा की नदी प्रणालियों पर पड़ता है। इससे महानदी का जलस्तर बढ़ने की आशंका रहती है।

उन्होंने कहा कि महानदी के जल प्रबंधन को प्राथमिकता दी जा रही है। इस संबंध में छत्तीसगढ़ सरकार के अधिकारियों के साथ बातचीत की गई है, ताकि जल प्रवाह और संभावित जल निकासी के बारे में समन्वय बना रहे। इससे निचले इलाकों में अचानक बाढ़ की स्थिति उत्पन्न होने की आशंका को कम करने में मदद मिलेगी।

लोगों से सतर्क रहने और निर्देशों का पालन करने की अपील

राज्य प्रशासन ने लोगों से मौसम विभाग की आधिकारिक चेतावनियों पर नजर रखने और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की है। आपदा प्रबंधन से जुड़ी टीमें सतर्क रखी गई हैं और सभी जिलों में संभावित परिस्थितियों के अनुसार कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।

सरकार का जोर चक्रवात के प्रत्यक्ष प्रभाव के साथ-साथ भारी बारिश, जलभराव और संभावित बाढ़ से होने वाले नुकसान को कम करने पर है। खास तौर पर मालकानगिरि और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में प्रशासनिक निगरानी बढ़ाई गई है।

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