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15 हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला गया
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गहरे डिप्रेशन के प्रभाव से 80 प्रखंड, 1,071 गांव और 49 शहरी वार्ड प्रभावित
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4,480 हेक्टेयर फसल डूबी
भुवनेश्वर। आंध्र प्रदेश–दक्षिण ओडिशा तट के पास बने शक्तिशाली गहरे डिप्रेशन के प्रभाव से ओडिशा में लगातार हो रही भारी बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। राज्य के कम से कम 10 जिले जलभराव, अचानक आई बाढ़ और कृषि क्षेत्र में भारी नुकसान से प्रभावित हैं। स्थिति को देखते हुए राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने उच्चस्तरीय समीक्षा के बाद बड़े पैमाने पर राहत एवं बचाव अभियान शुरू किए जाने की जानकारी दी।
बारिश और बाढ़ का असर ग्रामीण से लेकर शहरी क्षेत्रों तक दिखाई दे रहा है। राज्य के 80 प्रखंडों की 325 ग्राम पंचायतों के 1,071 गांवों में पानी भर गया है। वहीं 10 शहरी स्थानीय निकायों के 49 वार्ड भी गंभीर जलभराव की चपेट में हैं। निचले और भूस्खलन की आशंका वाले क्षेत्रों से 15 हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। लगातार बारिश के कारण करीब 4,480 हेक्टेयर कृषि भूमि में खड़ी फसलें पानी में डूब गई हैं।
गंजाम और मयूरभंज में दो की मौत
भारी बारिश के बीच दीवार गिरने की घटनाओं में गंजाम और मयूरभंज जिले में एक-एक व्यक्ति की मौत की सूचना है। दक्षिण ओडिशा के नवरंगपुर, कोरापुट, मालकानगिरि और गजपति जिलों में भी बारिश ने व्यापक असर डाला है। कई स्थानों पर बारिश का आंकड़ा 300 मिलीमीटर से अधिक दर्ज किया गया है।
उत्तर ओडिशा की प्रमुख नदियों पर प्रशासन की विशेष नजर है। जलका, बूढ़ाबलंग, बैतरणी और कानी नदियां चेतावनी स्तर को पार कर चुकी हैं या उसके करीब बह रही हैं। झारखंड से आने वाले पानी के कारण मयूरभंज में बाढ़ की स्थिति और गंभीर हो गई है, जहां करीब 20 प्रखंड प्रभावित बताए गए हैं।
मंत्री सुरेश पुजारी ने आशंका जताई कि यदि बाढ़ का पानी शाम तक बालेश्वर पहुंचता है तो बालेश्वर, भद्रक और जाजपुर के निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है। हालांकि दक्षिण ओडिशा की इंद्रावती और कोलाब जैसी नदियों की स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है। हीराकुद और इंद्रावती जलाशयों से पानी छोड़ने की प्रक्रिया पर भी व्यवस्थित रूप से निगरानी रखी जा रही है।
ओड्राफ, अग्निशमन दल और एनडीआरएफ राहत-बचाव में जुटे
राज्य सरकार ने राहत एवं बचाव कार्यों के लिए ओडिशा आपदा त्वरित कार्रवाई बल (ओड्राफ), अग्निशमन सेवा और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की टीमों को तैनात किया है। राहत शिविरों में पहुंचाए गए परिवारों को पका हुआ भोजन, सुरक्षित पेयजल और आपात चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।
गंभीर रूप से प्रभावित जिलों में शैक्षणिक संस्थानों और आंगनबाड़ी केंद्रों को बंद रखने के निर्देश दिए गए हैं। राज्य सरकार ने जिला कलेक्टरों को चौबीसों घंटे स्थिति पर नजर रखने और राहत-बचाव कार्यों को तेज रखने का निर्देश दिया है। सरकार ने एक बार फिर अपनी ‘शून्य जनहानि नीति’ के तहत संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और आवश्यकता पड़ने पर प्रशासन के निर्देश पर तत्काल सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है।
विशेष राहत आयुक्त और जल संसाधन विभाग लगातार नदियों के जलस्तर तथा जलाशयों में पानी के प्रवाह की निगरानी कर रहे हैं।
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