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सुवर्णरेखा और जलका नदी उफान पर, 154 गांव जलमग्न
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झारखंड के गलुडीहा बांध से भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने और समुद्र में ऊंचे ज्वार से बिगड़े हालात
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38 पंचायतें प्रभावित, चार प्रखंडों में जनजीवन अस्त-व्यस्त
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कई गांवों का संपर्क पूरी तरह कटा
बालेश्वर। ओडिशा के उत्तरी बालेश्वर जिले में बाढ़ का संकट लगातार गंभीर होता जा रहा है। सुवर्णरेखा और जलका नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंचने के कारण जिले में इस मौसम की बाढ़ की चौथी लहर ने व्यापक तबाही मचाई है। लगातार भारी बारिश और झारखंड से बड़े पैमाने पर पानी छोड़े जाने के कारण जिले की 38 पंचायतों के 154 गांव बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। कई गांवों का संपर्क आसपास के क्षेत्रों से पूरी तरह कट गया है।
स्थिति उस समय और गंभीर हो गई, जब पड़ोसी राज्य झारखंड के गलुडीहा बांध के फाटक खोल दिए गए और भारी मात्रा में पानी निचले इलाकों की ओर छोड़ा गया। पहले से ही उफनती नदियों में अतिरिक्त पानी पहुंचने से बाढ़ का दायरा बढ़ गया है। वहीं, बंगाल की खाड़ी में ऊंचे ज्वार के कारण नदियों का पानी समुद्र में आसानी से नहीं निकल पा रहा है, जिससे निचले इलाकों, कृषि भूमि और रिहायशी क्षेत्रों में पानी जमा होता जा रहा है।
खतरे के निशान से ऊपर बह रही सुवर्णरेखा और जलका
बालेश्वर जिले में बाढ़ की गंभीरता का अंदाजा दोनों प्रमुख नदियों के बढ़ते जलस्तर से लगाया जा सकता है। सुवर्णरेखा नदी का खतरे का निशान 9.45 मीटर निर्धारित है, जबकि शनिवार सुबह इसका जलस्तर बढ़कर 10.16 मीटर तक पहुंच गया। इसके बाद जलस्तर में और वृद्धि दर्ज की गई और यह 10.18 मीटर पर पहुंच गया।
इसी तरह, जलका नदी भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। मथानी में नदी का खतरे का निशान 6.50 मीटर है, जबकि लगातार बारिश के बाद इसका जलस्तर बढ़कर 6.78 मीटर हो गया है।
मयूरभंज जिले के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में लगातार बारिश
मयूरभंज जिले के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में लगातार बारिश के कारण जलका नदी में पानी का प्रवाह बढ़ रहा है। रासगोविंदपुर, सुलियापड़ा, मोरड़ा और चित्रड़ा क्षेत्रों में हो रही भारी बारिश का पानी नदी में पहुंचने से जलस्तर में तत्काल कमी आने की संभावना कम है।
भोगराई, बालियापाल, बस्ता और सदर प्रखंड में बाढ़ का व्यापक असर
बाढ़ ने बालेश्वर जिले के चार प्रमुख प्रखंडों में जनजीवन को प्रभावित किया है। भोगराई प्रखंड की 15 पंचायतें बाढ़ से प्रभावित हैं। यहां कई तटीय गांवों का संपर्क पूरी तरह कट गया है और लोगों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
बालियापाल प्रखंड की नौ पंचायतों में बाढ़ का पानी फैल गया है। अस्ति, बिशुनपुर, मधुपुरा और जामुकुंडा सहित कई गांव पूरी तरह अलग-थलग पड़ गए हैं। चौधुरीकुड़ा गांव में मुख्य संपर्क सड़क पर लगभग तीन फीट तेज बहाव वाला बाढ़ का पानी बह रहा है, जिससे सड़क मार्ग से आवागमन बाधित हो गया है।
बस्ता प्रखंड की 10 पंचायतें प्रभावित हुई हैं। स्थानीय स्तर पर भारी बारिश के कारण निचले इलाकों में पानी तेजी से जमा हो रहा है। वहीं, सदर प्रखंड की पांच पंचायतों में आसपास की सहायक नदियों के उफान से बाढ़ की स्थिति बनी हुई है।
राहत और बचाव कार्यों के लिए प्रशासन सतर्क
लगातार बढ़ते जलस्तर और गांवों के संपर्क कटने के कारण स्थानीय प्रशासन स्थिति पर करीबी नजर रख रहा है। प्रभावित क्षेत्रों में सड़क संपर्क, जलस्तर और संभावित राहत आवश्यकताओं का आकलन किया जा रहा है।
प्रशासनिक टीमें बाढ़ में फंसे लोगों तक राहत पहुंचाने और प्रभावित आबादी की सहायता के लिए आवश्यक तैयारियां कर रही हैं। नदियों में लगातार बढ़ते पानी और समुद्र में ऊंचे ज्वार के कारण स्थिति पर विशेष निगरानी रखी जा रही है।
फिलहाल सुवर्णरेखा और जलका नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर बने रहने तथा ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों से पानी आने के कारण उत्तरी बालेश्वर में बाढ़ का संकट बरकरार है।
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