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पेंशन कानून और 8वें वेतन आयोग को लेकर विरोध

  •     भुवनेश्वर सहित देशभर के पेंशनरों का धरना

  •     करीब 70 लाख पुराने पेंशनरों में नाराजगी

  •    2025 के पेंशन वैधीकरण कानून को वापस लेने और 8वें केंद्रीय वेतन आयोग में पेंशन संशोधन शामिल करने की मांग

भुवनेश्वर। ओडिशा समेत देशभर में सेवानिवृत्त कर्मचारियों और पेंशनरों का आंदोलन तेज हो गया है। करीब 70 लाख पुराने पेंशनरों में केंद्र सरकार की पेंशन व्यवस्था से जुड़ी हालिया नीतियों को लेकर नाराजगी है। इसी क्रम में इंडियन ऑडिट एंड अकाउंट्स डिपार्टमेंट (आईएएंडएडी) पेंशनर्स एसोसिएशन की ओर से 19 सितंबर 2026 को धरना दिया गया।

पेंशनरों ने केंद्र सरकार से पेंशन वैधीकरण अधिनियम, 2025 के प्रावधान वापस लेने और 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के विचारणीय विषयों में पुराने पेंशनरों की पेंशन संशोधन को शामिल करने की मांग की।

सेवानिवृत्ति की तारीख के आधार पर पेंशन में अंतर का मुद्दा

एसोसिएशन के अनुसार, सरकार ने अलग-अलग समय पर पेंशनरों को उनकी सेवानिवृत्ति की तारीख के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में रखने की व्यवस्था की है। 6वें केंद्रीय वेतन आयोग ने 1 जनवरी 2006 से वेतन और पेंशन संशोधन की सिफारिश की थी। इसके बाद 2008 में सरकार ने 2006 से पहले और बाद में सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए पेंशन संशोधन के अलग-अलग फार्मूले अधिसूचित किए।

पेंशनरों का कहना है कि इससे 2006 से पहले सेवानिवृत्त कर्मचारियों के साथ विसंगति पैदा हुई। इसके बाद कुछ पेंशनरों ने न्यायालय का रुख किया। एसोसिएशन के मुताबिक, दिल्ली हाईकोर्ट ने सरकार को 2006 से पहले सेवानिवृत्त पेंशनरों के लिए भी वही पेंशन संशोधन फार्मूला लागू करने तथा 1 जनवरी 2006 से बकाया भुगतान करने का निर्देश दिया था। केंद्र सरकार की अपील को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली।

2025 के कानून और 8वें वेतन आयोग को लेकर विरोध

पेंशनर संगठनों का आरोप है कि इसके बाद केंद्र सरकार ने वित्त अधिनियम, 2025 के तहत पेंशनरों के वर्गीकरण से संबंधित प्रावधान किए। एसोसिएशन के अनुसार, अधिनियम की धारा 147 से 150 के तहत सेवानिवृत्ति की तारीख के आधार पर पेंशनरों के बीच अंतर बनाए रखने का प्रावधान किया गया है। संगठन इसे पेंशनरों के हितों के खिलाफ मानता है।

पेंशनर संगठनों की दूसरी प्रमुख आपत्ति 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के विचारणीय विषयों को लेकर है। उनका कहना है कि 2026 से पहले सेवानिवृत्त पेंशनरों की पेंशन समीक्षा को आयोग के दायरे में शामिल नहीं किया गया है। संगठन इस प्रावधान में संशोधन की मांग कर रहे हैं।

दो प्रमुख मांगों को लेकर धरना

इंडियन ऑडिट एंड अकाउंट्स पेंशनर्स एसोसिएशन के कार्यकारी सदस्य और भुवनेश्वर स्थित महालेखाकार कार्यालय के मीडिया प्रभारी पुरुषोत्तम बाल ने बताया कि पेंशनर संगठन जुलाई 2025 से अपनी मांगों को लेकर विभिन्न स्तरों पर आंदोलन कर रहे हैं।

19 सितंबर को आयोजित धरने के दौरान मुख्य रूप से दो मांगें उठाई गईं, जिसमें पहली मांग पेंशन वैधीकरण अधिनियम, 2025 के संबंधित प्रावधानों को वापस लेना तथा दूसरी मांग 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के विचारणीय विषयों में संशोधन कर 2026 से पहले सेवानिवृत्त पेंशनरों की पेंशन संशोधन को भी शामिल किए जाने को लेकर थी।

पेंशनर संगठनों का कहना है कि उनकी मांगों पर केंद्र सरकार को शीघ्र निर्णय लेना चाहिए, ताकि लंबे समय से चली आ रही पेंशन विसंगतियों का समाधान किया जा सके।

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