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आठ बीजद विधायकों की अयोग्यता याचिका पर हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

  •     राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग के आरोप का मामला

  •     विधानसभा अध्यक्ष समेत पक्षकारों को 29 सितंबर तक जवाब दाखिल करने का निर्देश

कटक। ओडिशा विधानसभा के आठ बीजद विधायकों को कथित क्रॉस वोटिंग के आधार पर अयोग्य ठहराने की मांग को लेकर दाखिल याचिकाओं पर शुक्रवार को ओडिशा हाईकोर्ट ने सुनवाई की। न्यायमूर्ति आरके पटनायक की पीठ ने विधानसभा अध्यक्ष सुरमा पाढ़ी और अन्य पक्षकारों से जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 29 सितंबर को होगी।

बीजद की ओर से मुख्य सचेतक प्रमिला मल्लिक ने आठ अलग-अलग याचिकाएं दाखिल कर विधानसभा अध्यक्ष के 19 जून के उस निर्णय को चुनौती दी है, जिसमें आठ विधायकों के खिलाफ अयोग्यता की मांग वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया गया था। शुक्रवार को इनमें से चक्रमणि कंहर और सुभाषिनी जेना से संबंधित दो याचिकाओं पर सुनवाई हुई।

आठ विधायकों के नाम याचिका में शामिल

बीजद ने जिन विधायकों के खिलाफ अयोग्यता की मांग की है, उनमें अरविंद महापात्र, सनातन महाकुड़, चक्रमणि कंहर, देवी रंजन त्रिपाठी, नवकिशोर मल्लिक, सौविक बिस्वाल, सुभाषिनी जेना और रमाकांत भोई शामिल हैं। बीजद का आरोप है कि इन विधायकों ने मार्च में हुए राज्यसभा चुनाव के दौरान पार्टी के निर्देश के विपरीत मतदान किया था।

विधानसभा अध्यक्ष ने जून में इन याचिकाओं को प्रक्रियात्मक कमियों का हवाला देते हुए खारिज किया था। विधानसभा सचिवालय की अधिसूचना में याचिकाओं को अपर्याप्त सत्यापन और जरूरी दस्तावेजों के अभाव समेत अन्य कमियों के कारण विचार योग्य नहीं माना गया था।

बीजद ने हाईकोर्ट में दलील दी है कि इन कमियों को दूर किया जा सकता था और याचिकाओं को तकनीकी आधार पर खारिज करने के बजाय आरोपों पर गुण-दोष के आधार पर विचार किया जाना चाहिए था। पार्टी ने विधानसभा अध्यक्ष के निर्णय को रद्द कर मामले पर नए सिरे से विचार करने की मांग की है।

बीजद ने दसवीं अनुसूची का दिया हवाला

बीजद नेता और विधायक डॉ अरुण कुमार साहू ने शंख भवन में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि पार्टी के निर्देश की कथित अवहेलना और क्रॉस वोटिंग के मामले में संविधान की दसवीं अनुसूची (दल-बदल विरोधी कानून) के प्रावधान लागू होते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में अयोग्यता का प्रश्न विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष तय किया जाता है।

हालांकि, इस मामले में अंतिम निर्णय अभी नहीं हुआ है। हाईकोर्ट ने फिलहाल संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है और 29 सितंबर को आगे की सुनवाई निर्धारित की है।

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