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ओरंगुटान की अवैध प्रजनन को लेकर उठे सवाल

  •     तीन नर और दो मादा शावक एक साथ मिलने से जांच का दायरा बढ़ा

  •     वन्यजीव अपराध विशेषज्ञ ने जताई ब्रीडिंग नेटवर्क की आशंका

  •     भोगराई विधायक ने सीबीआई जांच की मांग की

बालेश्वर। ओडिशा में हाल ही में बचाए गए पांच ओरंगुटान शावकों की कथित तस्करी का मामला अब एक नए और गंभीर सवाल की ओर बढ़ रहा है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इन दुर्लभ वन्यजीवों की कथित तस्करी केवल मनोरंजन या किसी चिड़ियाघर में रखने के उद्देश्य से की जा रही थी या इसके पीछे अवैध कैद प्रजनन और व्यावसायिक शोषण का कोई संगठित नेटवर्क काम कर रहा था।

बचाए गए पांच ओरंगुटानों में तीन नर और दो मादा शावक बताए गए हैं। वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (डब्ल्यूसीसीबी) के जांच अधिकारियों की ओर से अपराध शाखा के विशेष कार्यबल (एसटीएफ) को दी गई जानकारी के बाद इस पहलू की भी जांच की जा रही है कि अलग-अलग लिंग के शावकों को एक साथ ले जाने के पीछे भविष्य में प्रजनन जोड़े तैयार करने की योजना तो नहीं थी।

नर-मादा शावकों को साथ ले जाने से बढ़ा शक

डब्ल्यूसीसीबी के पूर्व उपनिदेशक अनूप नायक के अनुसार, ओरंगुटान की वैश्विक आबादी बेहद सीमित है और उनकी संकटग्रस्त स्थिति के कारण अवैध वन्यजीव व्यापार में उनकी कीमत बढ़ गई है। उनका कहना है कि तस्कर इन जानवरों को केवल प्रदर्शन के लिए नहीं, बल्कि भविष्य में प्रजनन और व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए भी निशाना बना सकते हैं।

एक संगठित नेटवर्क की आशंका

उन्होंने आशंका जताई कि यदि कैद में प्रजनन के लिए ओरंगुटान का इस्तेमाल किया जा रहा है तो इसके पीछे एक संगठित नेटवर्क हो सकता है। हालांकि, यह अभी जांच का विषय है और एजेंसियां इस बात की पुष्टि करने में जुटी हैं कि पांचों शावकों को एक साथ ले जाने का वास्तविक उद्देश्य क्या था।

मिजोरम के दुर्गम इलाकों से लेकर पूर्वोत्तर के रास्तों तक जांच

अनूप नायक ने संभावना जताई कि मिजोरम के दूरदराज के पहाड़ी और घने वन क्षेत्र अवैध वन्यजीव प्रजनन गतिविधियों को छिपाने के लिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं। उन्होंने यह भी आशंका व्यक्त की कि बचाए गए ओरंगुटानों को पश्चिम बंगाल और असम से जुड़े मार्गों के जरिए आगे ले जाया गया हो सकता है।

हालांकि, इन संभावित मार्गों और ठिकानों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। जांच एजेंसियां ओरंगुटानों के मूल स्थान, उन्हें कहां से लाया गया, उनका संभावित गंतव्य क्या था और उन्हें किन लोगों के माध्यम से एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाया गया, इन सभी बिंदुओं की पड़ताल कर रही हैं।

कई स्तरों में बंटा हो सकता है तस्करी नेटवर्क

जांच में यह संभावना भी सामने आई है कि कथित तस्करी नेटवर्क कई स्तरों में बंटा हो सकता है। जानवरों की खरीद या उन्हें हासिल करने तथा संभावित प्रजनन से जुड़े लोगों के पास नेटवर्क के बारे में अधिक जानकारी हो सकती है, जबकि उन्हें एक राज्य से दूसरे राज्य या किसी दूसरे देश तक पहुंचाने वाले लोग नेटवर्क के केवल एक हिस्से से परिचित हो सकते हैं।

बिनी की कहानी ने भी उठाए प्रजनन से जुड़े सवाल

इस मामले में नंदनकानन प्राणी उद्यान की चर्चित ओरंगुटान बिनी का संदर्भ भी सामने आया है। अनूप नायक के अनुसार, बिनी नंदनकानन में लंबे समय तक लोगों के आकर्षण का केंद्र रही और वर्ष 2019 में उसकी मृत्यु हो गई। उनके मुताबिक, बिनी के लिए लंबे समय तक नर साथी की तलाश की गई, लेकिन उपयुक्त नर ओरंगुटान नहीं मिल सका।

बिनी की मृत्यु के बाद से नंदनकानन में कोई ओरंगुटान नहीं है। इसी संदर्भ में नायक ने मौजूदा मामले में प्रजनन के संभावित कोण की गंभीरता से जांच करने की आवश्यकता बताई है।

भोगराई विधायक ने मांगी सीबीआई जांच

भोगराई के विधायक गौतम बुद्ध दास ने मामले की पूरी सच्चाई जल्द सामने लाने की मांग की है। उन्होंने जांच से जुड़े सीसीटीवी फुटेज में कथित रूप से दिखाई देने वाली काले रंग की थार गाड़ी का भी उल्लेख किया और कहा कि मामले में कथित रूप से शामिल लोगों की पहचान को लेकर चर्चा हो रही है।

विधायक ने ओडिशा के डीजीपी विनयतोश मिश्र और वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के उन बयानों का भी उल्लेख किया, जिनमें मामले की सच्चाई जल्द सामने आने की बात कही गई है। हालांकि, दास का आरोप है कि अपराध शाखा की जांच अभी मुख्य रूप से ओडिशा और पश्चिम बंगाल तक सीमित है।

उन्होंने संभावित अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करी नेटवर्क की आशंका का हवाला देते हुए मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने की मांग की है।

मूल स्थान और अंतिम गंतव्य की तलाश

पांचों ओरंगुटानों को बचाए जाने के बाद अब एसटीएफ और अन्य जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ा सवाल इनके मूल स्थान, संभावित गंतव्य और कथित तस्करी नेटवर्क का पता लगाना है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि पांचों शावकों को एक साथ क्यों ले जाया जा रहा था और क्या इसके पीछे कोई संगठित अंतरराज्यीय या अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क था।

फिलहाल अवैध प्रजनन की आशंका जांच का एक कोण है, जिसकी पुष्टि होना बाकी है। जांच एजेंसियां बरामद ओरंगुटानों से जुड़े दस्तावेजों, परिवहन मार्ग, सीसीटीवी फुटेज और संदिग्ध नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं।

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