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अंतरराष्ट्रीय आलू केंद्र के सहयोग से संरक्षित खेती में आलू कटिंग व रूटेड कटिंग उत्पादन की शुरुआत
भुवनेश्वर। केंद्रीय ओडिशा विश्वविद्यालय (सीयूओ) के कृषि विभाग ने पेरू स्थित अंतरराष्ट्रीय आलू केंद्र (सीआईपी) के सहयोग से बुधवार को कोरापुट स्थित विश्वविद्यालय परिसर, सुनाबेड़ा में आलू नवाचार एवं प्रौद्योगिकी प्रदर्शन कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम में आलू बीज उत्पादन की उन्नत तकनीक, संरक्षित खेती, अनुसंधान सहयोग और क्षमता निर्माण पर विशेष चर्चा की गई।
सीयूओ के कुलपति प्रो (डॉ) अजीत कुमार शासनी ने विश्वविद्यालय परिसर में आलू परियोजना के तहत स्थापित पॉलीहाउस और नेट-हाउस सुविधाओं का उद्घाटन किया। इन सुविधाओं में संरक्षित खेती के अंतर्गत आलू कटिंग एवं रूटेड कटिंग के उत्पादन का प्रदर्शन किया गया।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के डीन प्रो नरसिंह चरण पंडा तथा अंतरराष्ट्रीय आलू केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिकों में ग्लोबल साइंटिस्ट डॉ कल्पना शर्मा, डॉ एली एटिएनो और डॉ नबाकिशोर परिडा उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत कृषि विभाग की प्रमुख डॉ मंजुश्री सिंह के स्वागत संबोधन से हुई। उन्होंने कृषि विभाग द्वारा नवाचार आधारित, तकनीक-संचालित और खेत-केंद्रित कृषि अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयासों पर प्रकाश डाला।
तकनीकी सत्रों में आलू बीज उत्पादन की उन्नत तकनीकों, विशेष रूप से एयरोपोनिक्स और एपिकल रूट कटिंग, पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री तैयार करने तथा कोरापुट और आसपास के क्षेत्रों की कृषि-जलवायु परिस्थितियों के अनुकूल टिकाऊ आलू उत्पादन प्रणाली विकसित करने में इन तकनीकों की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया।
डॉ कल्पना शर्मा ने सीयूओ और अंतरराष्ट्रीय आलू केंद्र के बीच शैक्षणिक एवं अनुसंधान सहयोग को मजबूत करने की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कृषि विभाग के विद्यार्थियों को सीआईपी की चल रही सहयोगात्मक अनुसंधान परियोजनाओं से जोड़ने का सुझाव दिया, ताकि उन्हें आधुनिक आलू तकनीकों और अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान पद्धतियों का व्यावहारिक अनुभव मिल सके।
कुलपति प्रो शासनी ने दोनों संस्थानों के बीच संस्थागत सहयोग को मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने संयुक्त अनुसंधान, छात्र प्रशिक्षण, प्रौद्योगिकी प्रदर्शन और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) की प्रक्रिया शुरू करने का सुझाव दिया।
डॉ एली एटिएनो और डॉ नवकिशोर परिडा ने कृषि विभाग के साथ पिछले चार महीनों के अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने विभाग की सक्रिय भागीदारी, वैज्ञानिक रुचि तथा कृषि नवाचार और खेत-केंद्रित अनुसंधान के प्रति प्रतिबद्धता की सराहना की।
कार्यक्रम के दौरान सीआईपी के वैज्ञानिकों, विश्वविद्यालय के अधिकारियों, शिक्षकों और विद्यार्थियों ने पॉलीहाउस तथा नेट-हाउस सुविधाओं का भी निरीक्षण किया। इस दौरान संरक्षित खेती के तहत आलू कटिंग और रूटेड कटिंग उत्पादन की तकनीक का प्रत्यक्ष प्रदर्शन किया गया।
कार्यक्रम कोरापुट क्षेत्र में आधुनिक आलू उत्पादन तकनीकों को बढ़ावा देने, अनुसंधान सहयोग को मजबूत करने तथा प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और क्षमता निर्माण के नए अवसर विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया।
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