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जापान की संसद भंग, 8 फरवरी को मध्यावधि चुनाव

टोक्यो। जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने शुक्रवार को डाइट के 465 सदस्यों वाले निचले सदन को भंग कर दिया। इसी के साथ जापान में 8 फरवरी को मध्यावधि चुनाव का रास्ता साफ हो गया है। तकाइची ने यह फैसला केवल तीन महीने के कार्यकाल के बाद लिया है।
जापान टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, यह कदम उनकी लोकप्रियता का फायदा उठाने की एक कोशिश है ताकि सत्तारूढ़ पार्टी हाल के सालों में हुए बड़े नुकसान के बाद फिर से अपनी स्थिति मजबूत कर सके। लेकिन इससे उस बजट को संसदीय मंजूरी मिलने में देरी होगी जिसका मकसद संघर्ष कर रही अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना और बढ़ती कीमतों को कम करना है।
अक्टूबर में जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री चुनी गईं ताकाइची सिर्फ तीन महीने से पद पर हैं। ताकाइची की लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (एलडीपी) को अभी भी कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। पार्टी भ्रष्टाचार से जुड़े कई मामलों और पार्टी के विवादास्पद यूनिफिकेशन चर्च के साथ पिछले संबंधों से जूझ रही है। यह साफ नहीं है कि नया विपक्षी सेंट्रिस्ट रिफॉर्म अलायंस मध्यम वर्ग के वोटरों को आकर्षित कर पाएगा या नहीं, जबकि विपक्षी पार्टियां अभी भी इतनी बिखरी हुई हैं कि वे एलडीपी के लिए कोई गंभीर खतरा पैदा नहीं कर सकतीं। ताकाइची को कुछ समय चीन के साथ भी दुश्मनी का सामना करना पड़ रहा है।
निचले सदन के स्पीकर फुकुशिरो नुकागा के संसद भंग करने की घोषणा पर सांसदों ने खड़े होकर उनका अभिवादन किया। ताकाइची की जल्दी चुनाव कराने की योजना का मकसद अपनी लोकप्रियता का फायदा उठाकर जापान की दो-सदनीय संसद के निचले सदन में बहुमत हासिल करना है। घोटालों से घिरी एलडीपी और उसके गठबंधन के पास 2024 के चुनाव में हार के बाद निचले सदन में बहुत कम बहुमत था। गठबंधन के पास ऊपरी सदन में बहुमत नहीं है और अपने एजेंडे को पास कराने के लिए वह विपक्षी सदस्यों के वोटों पर निर्भर है।

विपक्षी नेताओं ने ताकाइची की आलोचना की कि उन्होंने जरूरी आर्थिक उपायों को फंड देने के लिए जरूरी बजट को पास करने में देरी की। चुनाव की योजनाओं की घोषणा करते हुए सोमवार को एक संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने कहा, “मेरा मानना ​​है कि एकमात्र विकल्प यह है कि लोग यह तय करें कि सनाए ताकाइची को प्रधानमंत्री बनना चाहिए या नहीं। मैं इस पर अपना प्रधानमंत्री का करियर दांव पर लगा रही हूं।”
साभार – हिस

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