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खेलो इंडिया शीतकालीन खेल में साहिल, सैयद और फैजान बर्फ पर गढ़ रहे नया इतिहास

गुलमर्ग (जम्मू-कश्मीर)। गुलमर्ग की बर्फीली ढलानों पर ठंडी हवाएं संकल्प को और मजबूत करती हैं, इसीलिए वहां तीन युवा भारतीय अल्पाइन स्की खिलाड़ी अपने भविष्य की नई इबारत लिख रहे हैं। मनाली की ऊंची पहाड़ियों और कश्मीर की बर्फीली वादियों से आने वाले ये खिलाड़ी भले अलग पृष्ठभूमि रखते हों, लेकिन उनका लक्ष्य शीतकालीन ओलंपिक में भारत का परचम लहराना है।
इन तीनों खिलाड़ियों के मार्गदर्शक दो बार शीतकालीन ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके मोहम्मद आरिफ खान हैं। आरिफ खान के मार्गदर्शन में साहिल ठाकुर, सैयद जैन और फैजान अहमद लोन ने हाल ही में इटली के सूदतिरोल क्षेत्र में प्रशिक्षण लिया, जहां उन्होंने यूरोप के श्रेष्ठ अल्पाइन खिलाड़ियों की तकनीकी कठोरता और प्रतिस्पर्धी मानसिकता को नजदीक से समझा। 19 वर्षीय साहिल ठाकुर के लिए स्कीइंग विरासत भी है और स्वभाव भी।
मनाली में पले-बढ़े साहिल के पिता देवी चंद और उनके भाई रजनीश तथा राहुल भी स्की खिलाड़ी हैं। साहिल कहते हैं, “इटली से लौटने के बाद मुझे अपने खेल में अंतर महसूस हुआ। प्रशिक्षण की बारीकियां और तकनीक पर ध्यान से पर्वत को देखने का नजरिया बदल जाता है।” राष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण और रजत पदक जीत चुके साहिल ने 2024 में दक्षिण कोरिया के गंगवॉन में आयोजित शीतकालीन युवा ओलंपिक खेलों में भी भाग लिया।
अब उनकी नजर वर्ष 2030 में फ्रांस के आल्प्स पर्वत क्षेत्र में होने वाले शीतकालीन ओलंपिक पर है। यदि साहिल की यात्रा पारिवारिक विरासत से प्रेरित है, तो 16 वर्षीय सैयद जैन की कहानी जुनून और परिश्रम की मिसाल है। श्रीनगर के बाहरी क्षेत्र हुमहामा में पले-बढ़े जैन ने वर्ष 2020 में आयोजित प्रथम खेलो इंडिया शीतकालीन खेलों में स्लालम और जाइंट स्लालम स्पर्धाओं में दो स्वर्ण पदक जीते।
इसके बाद वर्ष 2022 की जूनियर राष्ट्रीय प्रतियोगिता में दो रजत पदक हासिल किए। जैन का प्रारंभिक प्रशिक्षण गुलमर्ग स्थित भारतीय स्कीइंग और पर्वतारोहण संस्थान में हुआ। वह कहते हैं, “स्कीइंग को यूरोपीय खेल माना जाता है, लेकिन आरिफ खान जैसे खिलाड़ियों ने दिखाया है कि यह भारत का भी हो सकता है।”
उन्होंने छह बार ओलंपिक में भाग ले चुके शिवा केशवन को भी अपनी प्रेरणा बताया। 19 वर्षीय फैजान अहमद लोन की कहानी अवसर और संघर्ष की मिसाल है। पांच बार राष्ट्रीय स्वर्ण पदक जीतने वाले और चार बार खेलो इंडिया विजेता रहे फैजान कहते हैं, “स्कीइंग महंगा खेल है। आरिफ खान ने केवल प्रशिक्षण ही नहीं दिया, बल्कि प्रायोजन दिलाने में भी मदद की, जिससे मैं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भाग ले सका।”
फैजान ने वर्ष 2025 में चीन के हार्बिन में आयोजित शीतकालीन एशियाई खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व किया और दुबई तथा कजाकिस्तान में अंतरराष्ट्रीय स्की महासंघ की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया। तीनों खिलाड़ियों के हेलमेट पर इटली की ओलंपिक चैंपियन फेदेरिका ब्रिग्नोने के हस्ताक्षर अंकित हैं, जो उनके लिए प्रेरणा का प्रतीक हैं। वे कहते हैं, “उनके हस्ताक्षर हमें याद दिलाते हैं कि हम यह सब क्यों कर रहे हैं। यह हमें केंद्रित और सपनों के प्रति समर्पित रखता है।”
गुलमर्ग की ढलानों पर साहिल, जैन और फैजान अब केवल प्रशिक्षणरत खिलाड़ी नहीं रहे, बल्कि वे उस भारत के प्रतिनिधि बन चुके हैं जो शीतकालीन खेलों में अपनी पहचान बनाने की राह पर आगे बढ़ रहा है। बर्फ की हर ढलान के साथ उनका आत्मविश्वास बढ़ रहा है और वे इतिहास की ओर अपने कदम मजबूती से बढ़ा रहे हैं।
साभार – हिस

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