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10 लाख में पांच बच्चे होते हैं ऐसी बीमारी के शिकार
ब्रह्मपुर. गंजाम जिले के एमकेसीजी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में बुधवार को एक अजीब और दुर्लभ आनुवंशिक विकार के साथ एक बच्चे का जन्म हुआ है. इसे हार्लेक्विन इचथ्योसिस नामक एक दुर्लभ आनुवंशिक विकार से पीड़ित बताया गया है. यह अब भी जिंदा है. इस बच्चे के जन्म के बाद अस्पताल में सनसनी फैल गयी. इस बच्चे को देखने के बाद इस अस्पताल के डॉक्टर, नर्स और अन्य चिकित्सा कर्मचारी आश्चर्यचिक हैं. रिपोर्टों के अनुसार, नवजात शिशु को कुछ दिनों तक जीवित रहने के लिए महत्वपूर्ण चिकित्सा सहायता की आवश्यकता होगी. सूत्रों ने बताया कि अध्ययनों के अनुसार, यह एक तरह की बीमारी है, जो लगभग 10 लाख नवजात शिशुओं में से पांच को प्रभावित करती है. इस तरह के एक दुर्लभ आनुवंशिक विकार के साथ पैदा होने वाले शिशुओं के बचने की संभावना बहुत कम होती है.
इससे पहले 2016 में नागपुर, महाराष्ट्र में एक ऐसा मामला सामने आया था. माना जाता है कि यह दुर्लभ बीमारी से पीड़ित पहला बच्चा है. सूत्रों ने बताया कि शिशु लंबे दिनों तक जीवित नहीं रह सका और उसके जन्म के कुछ दिनों बाद ही उसकी मृत्यु हो गई.
बच्चे का पूरा शरीर इतना विचित्र और हृदय विदारक है कि आप उसे देख नहीं सकते हैं. बच्चे का सिर अजीब सा है. नवजात शिशु के सभी अंग दुर्लभ आनुवंशिक विकार से प्रभावित हुए हैं. इसकी त्वचा बहुत मोटी और सख्त है. सूत्रों ने बताया कि बच्चे के शरीर पर हीरे के आकार की बड़ी-बड़ी प्लेटें हैं और देखने में गहरी दरारों से एक-दूसरे से अलग है. मेडिकल के सूत्रों ने बताया कि अध्ययन का कहना है कि रोग एबीसीए 12 जीन प्रोटीन में उत्परिवर्तन के कारण होता है, जो कोशिकाओं में वसा के परिवहन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है जो त्वचा की सबसे बाहरी परत बनाते हैं.
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