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20 दिनों में हाथियों की मौत की संख्या सात हुई
भवानीपाटना. कर्लापाट अभ्यारण्य के घुसुड़ीगुड़ी में और एक हाथी शावक का शव बरामद किया गया है. इसके साथ ही 20 दिनों में हाथियों की मौत की संख्या बढ़कर सात हो गयी है. सूत्रों ने बताया कि इस हाथी शावक की मौत संदिग्ध रक्तस्रावी सेप्टीसीमिया बीमारी के कारण हुई है. इससे पहले छह मादा हाथियों (सभी गर्भवती) की मौत बैक्टीरिया संक्रमण से हुई थी. इनमें से पांच के शव घुसुड़ीगुड़ी से तथा एक का शव तेंतुलीपदर से बरामद किया गया था. लगातार छह हाथियों की मौत के बाद दिल्ली की एक केंद्रीय टीम ने शनिवार को स्थानों का दौरा किया तथा हाथियों की मौत का कारण सेप्टीसीमिया की पुष्टि की थी. हाथियों की मौत के बाद जिला प्रशासन और वन विभाग ने जांच करने के लिए कदम उठाए. घरेलू पशुओं के टीकाकरण, जल निकायों के कीटाणुशोधन और आगे के संक्रमण को रोकने के लिए जागरूकता कार्यक्रम जैसे एहतियाती उपाय किए गए हैं. कलाहांडी के जिलाधिकारी जीपी हर्षद ने कहा कि इन गतिविधियों को एक महीने के लिए जारी रखा जाएगा.
शनिवार को साइटों का दौरा करने वाली केंद्रीय टीम का हिस्सा रहे हाथी प्राकोष्ठ के राष्ट्रीय समन्वयक पीपी पंडा ने कहा कि गर्भवती हाथी के शरीर में उच्च तनाव स्तर से सेप्टीसीमिया फैल गया है. जब वे गर्भवती थीं, उनके शरीर में तनाव का स्तर बहुत अधिक था, जो संक्रमण के प्रति बहुत संवेदनशील था. सेंटर फॉर वाइल्डलाइफ (आईसीएआर-आईवीआरआई बरेली) के वैज्ञानिक करिकालन मठेश, ओयूएटी में महामारी विज्ञान और निवारक चिकित्सा विभाग के प्रमुख प्रो निरंजन साहू विशेषज्ञ टीम के अन्य सदस्य थे. टीम ने पांच साइटों से नमूने एकत्र किए और उन्हें परीक्षण के लिए भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) भेज दिया.
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