
कटक. उड़ीसा उच्च न्यायालय में दायर एक हलफनामे में राज्य सरकार ने कहा कि राज्य में निजी स्कूलों की फीस को विनियमित करने के लिए कोई नीति नहीं है. उड़ीसा उच्च न्यायालय में दायर एक याचिका और उसके बाद स्कूल फीस की माफी पर उच्च न्यायालय द्वारा मांगे गए स्पष्टीकरण के जवाब में हलफनामा दायर किया गया था. सरकार ने महाधिवक्ता द्वारा दायर हलफनामे में कहा है कि राज्य के पास सीबीएसई या आईसीएसई बोर्ड से संबद्ध स्कूलों में फीस को विनियमित करने की कोई नीति नहीं है. इसके अलावा अशासकीय विद्यालयों के लिए शुल्क निर्धारण के लिए राज्य या जिला स्तर पर कोई व्यवस्था नहीं है. इस मामले में याचिकाकर्ता के वकील विभूति भूषण चौधरी ने कहा कि ओडिशा में बड़ी संख्या में सरकारी स्कूल हैं, लेकिन अभिभावक अन्य सुविधायों के कारण अपने बच्चों को निजी स्कूलों में दाखिला देने के लिए चुनते हैं. चौधरी ने कहा कि उच्च न्यायालय ने कहा कि पंजाब, हरियाणा और दिल्ली सरकारों ने निजी स्कूलों में फीस को विनियमित करने के लिए नियम बनाए हैं, तो ओडिशा सरकार राज्य में स्कूल फीस को विनियमित करने के लिए कानून क्यों नहीं ला रही है. ओडिशा अभिवावक महासंघ और अन्य ने इस संबंध में एक याचिका दायर की थी और फीस की माफी के लिए मांग की थी, क्योंकि राज्य द्वारा कोविद-19 को एक आपदा के रूप में घोषित किया गया था. अब इस मामले में अगली सुनवाई 7 दिसंबर को तय की गई है.
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