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सक्रिय हुई तीनों पार्टियां, सियासी हलचल हुई तेज
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बीजेडी की होंगी बैठकें
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कांग्रेस विधायकों की हुई बेंगलुरु शिफ्टिंग
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भाजपा के केंद्रीय पर्यवेक्षक भुवनेश्वर पहुंचे
भुवनेश्वर। ओडिशा में आगामी राज्यसभा चुनाव में क्रॉस-वोटिंग के डर को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। क्रॉस-वोटिंग की आशंका के बीच बीजेडी, भाजपा और कांग्रेस तीनों पार्टियां अपने-अपने विधायकों को एकजुट रखने और चुनावी रणनीति मजबूत करने में जुट गई हैं।
बीजेडी सुप्रीमो नवीन पटनायक ने पार्टी विधायकों को विशेष बैठकों और प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल होने के निर्देश दिए हैं, वहीं कांग्रेस ने अपने विधायकों को बेंगलुरु के एक रिजॉर्ट में शिफ्ट कर दिया है। इस बीच भाजपा ने भी स्थिति पर नजर रखने के लिए अपना केंद्रीय पर्यवेक्षक भुवनेश्वर भेज दिया है।
बीजेडी विधायकों मिलेगा प्रशिक्षण, लगातार बैठकें
नवीन पटनायक ने पार्टी विधायकों को 13 से 15 मार्च तक नवीन निवास में आयोजित बैठकों और प्रशिक्षण सत्रों में शामिल होने को कहा है। 13 मार्च को शाम 5:30 बजे से 7:30 बजे तक विधायकों को राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया पर प्रस्तुतीकरण दिया जाएगा। इसके बाद 14 मार्च को इसी समय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित होगा। 16 मार्च को बीजेडी विधायक दल की बैठक भी बुलाई गई है, जिसमें सभी विधायकों की उपस्थिति अनिवार्य बताई गई है।
कांग्रेस ने विधायकों को बेंगलुरु भेजा
क्रॉस-वोटिंग की आशंका के बीच कांग्रेस ने अपने 14 विधायकों को बेंगलुरु भेज दिया है। इनमें पार्टी के मुख्य सचेतक सीएस राजन एक्का भी शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार, विधायक अशोक प्रधान, प्रफुल्ल चंद्र प्रधान, पवित्र साउंटा, काड्राका अपाला स्वामी, सीएस राजेन एक्का व सत्यजीत गमांग गुरुवार देर रात अपने परिवार के सदस्यों के साथ बेंगलुरु पहुंचे। कुल 14 लोग रात करीब 11 बजे केम्पागौडा हवाई अड्डे पर उतरे। ओडिशा कांग्रेस अध्यक्ष भक्त चरण दास और प्रवक्ता दुर्गा प्रसाद पंडा भी उनके साथ गए। कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की निगरानी में इन विधायकों को केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से पुलिस सुरक्षा के साथ रमनगरा जिले के बिदादी स्थित वंडरला रिजॉर्ट ले जाया गया।
भाजपा के केंद्रीय पर्यवेक्षक भुवनेश्वर पहुंचे
राज्यसभा चुनाव को लेकर भाजपा ने भी अपनी रणनीति तेज कर दी है। पार्टी के केंद्रीय पर्यवेक्षक चंद्रशेखर बावनकुले भुवनेश्वर पहुंच चुके हैं। उनके दौरे को चुनाव से पहले भाजपा की तैयारियों और विधायकों के साथ समन्वय मजबूत करने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि मतदान तक विधायक अपने-अपने दलों के साथ कितने एकजुट रहते हैं।
चौथी सीट पर टिकी है सियासी नजर
147 सदस्यीय ओडिशा विधानसभा में भाजपा के पास 79 सीटें, बीजेडी के पास 50 सीटें और कांग्रेस के पास 14 सीटें हैं। बीजेडी ने संतनु मिश्र और डा दत्तेश्वर होता को उम्मीदवार बनाया है। भाजपा ने दो उम्मीदवार उतारे हैं और निर्दलीय दिलीप राय को समर्थन दिया है। चौथी सीट का परिणाम काफी हद तक कांग्रेस के वोटों पर निर्भर माना जा रहा है।
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