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एम्स भुवनेश्वर में रोबोट से लीवर ट्रांसप्लांट शुरू

  •     केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने लिवर ट्रांसप्लांट यूनिट और रोबोटिक सर्जरी सिस्टम का वर्चुअली उद्घाटन किया

  •     ओडिशा में पहली बार सरकारी संस्थान में समग्र रोबोटिक शल्य कार्यक्रम

  •     विश्वस्तरीय उपचार अब ओडिशा में उपलब्ध

भुवनेश्वर। ओडिशा की स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज करते हुए भुवनेश्वर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में समग्र यकृत प्रत्यारोपण कार्यक्रम और अत्याधुनिक शल्य रोबोट प्रणाली की शुरुआत हो गई है।

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने आभासी माध्यम से यकृत प्रत्यारोपण इकाई का उद्घाटन तथा उन्नत रोबोटिक शल्य प्रणाली का शुभारंभ किया।

इस अवसर पर नड्डा ने कहा कि यह संस्थान की प्रगति यात्रा में ऐतिहासिक क्षण है। उन्होंने कहा कि यकृत प्रत्यारोपण कार्यक्रम गंभीर यकृत रोग से पीड़ित रोगियों के लिए जीवन रक्षक उपचार को ओडिशा और पूर्वी भारत के भीतर सुलभ बनाएगा।

उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि संस्थान पहले से ही गुर्दा और अस्थि मज्जा प्रत्यारोपण सफलतापूर्वक कर रहा है, और अब यकृत प्रत्यारोपण की शुरुआत उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा देगी।

दो सफल लिवर ट्रांसप्लांट हुए

एक अच्छी शुरुआत के तौर पर भुवनेश्वर एम्स में दो सफल लिवर ट्रांसप्लांट पहले ही किए जा चुके हैं, दोनों मरीज़ ठीक हो रहे हैं और नॉर्मल ज़िंदगी जी रहे हैं, जो इंस्टीट्यूट की बढ़ती क्लिनिकल क्षमताओं को दिखाता है। इस कामयाबी के पीछे सबकी मिली-जुली कोशिशों के बारे में बताते हुए नड्डा ने कहा कि यह सर्जिकल गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट, डॉक्टरों, नर्सों, टेक्नीशियन और सपोर्ट स्टाफ की बिना थके लगन और मेहनत का नतीजा है, जिनके मिलकर काम करने से ये मुश्किल प्रोसीजर सफलतापूर्वक हो पाए। उन्होंने पूरे मेडिकल और नॉन-मेडिकल वर्कफोर्स को उनके पक्के कमिटमेंट और प्रोफेशनलिज्म के लिए बधाई दी।

अंगदान के राष्ट्रीय संकल्प से जुड़ा कदम

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अंगदान को जन आंदोलन बनाने के राष्ट्रीय आह्वान के अनुरूप यह पहल एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह नई इकाई अंगदान की भावना को और सशक्त करेगी तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को बिना लंबी दूरी तय किए समुचित उपचार उपलब्ध कराएगी।

अत्याधुनिक शल्य कक्ष और गहन चिकित्सा इकाई

संस्थान में अत्याधुनिक यकृत प्रत्यारोपण शल्य कक्ष और दस शैयाओं वाली उन्नत गहन चिकित्सा इकाई स्थापित की गई है। प्रत्यारोपण के बाद नियमित देखभाल के लिए विशेष परामर्श केंद्र भी प्रारंभ किया गया है। प्रारंभिक चरण में दो सफल यकृत प्रत्यारोपण किए जा चुके हैं और दोनों रोगी स्वस्थ जीवन व्यतीत कर रहे हैं।

रोबोटिक शल्य प्रणाली से नई क्रांति

रोबोटिक शल्य प्रणाली की स्थापना के साथ यह ओडिशा का पहला सरकारी चिकित्सा संस्थान बन गया है, जहां समग्र रोबोटिक शल्य कार्यक्रम आरंभ हुआ है। यह तकनीक मूत्र रोग, स्त्री रोग, सामान्य शल्य तथा शिशु शल्य जैसे विभागों में उपयोग की जाएगी। इस प्रणाली से शल्य क्रिया में अधिक सटीकता, कम रक्तस्राव, कम समय में स्वस्थ होना तथा अस्पताल में कम अवधि तक ठहराव संभव होगा। साथ ही, रोगियों को उन्नत उपचार के लिए राज्य से बाहर जाने की आवश्यकता भी कम होगी।

जन स्वास्थ्य सेवाओं को नई मजबूती

इस अवसर पर भुवनेश्वर सांसद अपराजिता षाड़ंगी तथा केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव भी उपस्थित रहीं। संस्थान के कार्यकारी निदेशक डॉ आशुतोष बिस्वास ने कहा कि यह उपलब्धि चिकित्सकोंनर्सोंतकनीशियनों और सहयोगी कर्मचारियों के समर्पित प्रयासों का परिणाम है। स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में यह पहल न केवल ओडिशा बल्कि पड़ोसी राज्यों के लिए भी जीवनदायी सिद्ध होगी और सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगी।

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