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राज्य के 22 राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान बनेंगे उत्कृष्टता केंद्र
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युवाओं को उद्योग-योग्य बनाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता: मंत्री
भुवनेश्वर। राज्य में कौशल विकास व्यवस्था को उद्योग की आवश्यकताओं से सीधे जोड़ने की दिशा में आज एक महत्वपूर्ण पहल की गई। भुवनेश्वर स्थित विश्व कौशल केंद्र में उद्योग तथा कौशल विकास एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री संपद चंद्र स्वाईं की उपस्थिति में चार महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान हुआ। यह पहल राज्य के युवाओं को आधुनिक उद्योगों के अनुरूप दक्ष बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि ओडिशा के युवाओं को उद्योग-योग्य बनाना सरकार की मूल प्राथमिकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उद्योगों के निर्माण में आधारभूत संरचना महत्वपूर्ण होती है, किंतु उन्हें स्थायी गति देने के लिए कुशल मानव संसाधन की आवश्यकता होती है। कौशल विकास कोई परिधीय कल्याणकारी उपाय नहीं, बल्कि समावेशी आर्थिक प्रगति और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को सशक्त बनाने की मूल रणनीति है। युवाओं को भविष्य उन्मुख दक्षताओं से सुसज्जित करना राज्य के दीर्घकालिक विकास लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए अनिवार्य है।
22 राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों का उन्नयन
कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण टाटा टेक्नोलॉजीज के साथ साझेदारी रहा। इस सहयोग के अंतर्गत राज्य के 22 राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों को लगभग 779 करोड़ रुपये की कुल लागत से उत्कृष्टता केंद्रों के रूप में विकसित किया जाएगा।
समझौते के अनुसार, परियोजना लागत का 14 प्रतिशत वहन राज्य सरकार करेगी, जबकि शेष लगभग 86 प्रतिशत व्यय कंपनी द्वारा किया जाएगा। उन्नत संस्थानों में आधुनिक प्रयोगशालाएं और उद्योग-स्तरीय उपकरण स्थापित किए जाएंगे, जिससे प्रशिक्षण व्यवस्था आधुनिक औद्योगिक मानकों के अनुरूप हो सके।
इन उत्कृष्टता केंद्रों में उच्च विकासशील और उभरते क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जिनमें वाहन निर्माण (विद्युत वाहन सहित), अभिकल्प एवं सत्यापन उपकरण, त्रि-आयामी मुद्रण, वस्तुओं का अंतरजाल, रोबोटिकी, उन्नत विनिर्माण, उच्च स्तरीय यंत्र कटाई तकनीक, उन्नत जल संयोजन तकनीक तथा प्रक्रिया नियंत्रण और स्वचालन तकनीक शामिल हैं।
कंपनी पांच वर्षों तक प्रशिक्षकों की नियुक्ति, उपकरणों के रखरखाव तथा प्रशिक्षणार्थियों के नियोजन में सहयोग सहित व्यापक मार्गदर्शन प्रदान करेगी, जिससे उद्योग से सशक्त जुड़ाव और स्थायी परिणाम सुनिश्चित हो सकें।
बालिकाओं के लिए डिजिटल कौशल और नियोजन का मार्ग
इस अवसर पर संयुक्त राष्ट्र बाल कोष के साथ भी एक महत्वपूर्ण समझौता हुआ। इसके तहत युवतियों के लिए डिजिटल कौशल प्रशिक्षण और परिणाम आधारित वित्त पोषण व्यवस्था के माध्यम से दो हजार से अधिक बालिकाओं को नियोजन से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।
रोबोटिकी और स्वचालन में नई क्षमता
कावासाकी रोबोटिक्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के साथ सहयोग के माध्यम से रोबोटिकी, स्वचालन तथा उन्नत औद्योगिक तकनीकों में क्षमता सुदृढ़ की जाएगी, ताकि राज्य के युवा आधुनिक विनिर्माण तंत्र के लिए तैयार हो सकें।
विदेशी रोजगार के अवसरों का सृजन
आत्रेय ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड के साथ हुए समझौते के तहत जर्मनी और अन्य यूरोपीय देशों में संरचित विदेशी रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। इसमें कौशल प्रशिक्षण, भाषा प्रशिक्षण, नियोजन सहायता तथा नियोजन उपरांत सहयोग को समेकित किया जाएगा।
कार्यक्रम में कौशल विकास एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी तथा विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। यह पहल राज्य के युवाओं को सशक्त, आत्मनिर्भर और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम मानी जा रही है।
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