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बिना मान्यता वाले विद्यालय में दसवीं तक पढ़ाई पड़ी महंगी

  •     पांच विद्यार्थियों को माध्यमिक परीक्षा से रोका गया, भविष्य अधर में

  •     विद्यालय को केवल कक्षा आठ तक थी अनुमति

  •     फिर भी चल रही थी कक्षा दस तक पढ़ाई

गजपति। बिना मान्यता वाले विद्यालय में कक्षा दस तक पढ़ाई करनी पांच विद्यार्थियों के लिए भारी पड़ गयी। गजपति जिले में चल रही माध्यमिक कक्षा दसवीं की परीक्षा से पांच विद्यार्थियों को वंचित कर दिया गया, जिससे उनका भविष्य अधर में लटक गया है।

बताया गया है कि संबंधित विद्यालय को केवल कक्षा आठ तक की मान्यता प्राप्त थी, लेकिन वहां कक्षा दस तक पढ़ाई कराई जा रही थी। परीक्षा के समय प्रवेश पत्र न मिलने के कारण विद्यार्थियों को परीक्षा केंद्र में बैठने की अनुमति नहीं दी गई।

अभिभावकों का विद्यालय पर गंभीर आरोप

आक्रोशित अभिभावकों ने मंगलवार को जिला कलेक्टर से मिलकर शिकायत दर्ज कराई और प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। उनका आरोप है कि काशीनगर स्थित स्मार्ट पब्लिक स्कूल ने कई महीनों तक बच्चों को परीक्षा की तैयारी कराई और लगातार यह आश्वासन देता रहा कि प्रवेश पत्र मिल जाएगा।

परिजनों का कहना है कि विद्यालय प्रबंधन ने आवश्यक दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी नहीं की और शिक्षा बोर्ड से समुचित समन्वय नहीं किया। परीक्षा के दिन जब प्रवेश पत्र नहीं मिला, तो विद्यार्थियों को केंद्र से लौटा दिया गया, जिससे वे मानसिक रूप से आहत हैं।

जिला शिक्षा अधिकारी ने शुरू की जांच

जिला शिक्षा अधिकारी मयाधर साहू ने बताया कि विद्यालय के विरुद्ध शिकायत प्राप्त हुई है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, विद्यालय को केवल कक्षा आठ तक की मान्यता मिली थी। यह जांच की जा रही है कि कक्षा आठ से आगे की पढ़ाई कैसे कराई जा रही थी। दोष सिद्ध होने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

हालांकि विद्यालय के प्रधानाचार्य का कहना है कि संबंधित विद्यार्थी नियमित छात्र नहीं थे, बल्कि एक शिक्षक से निजी शिक्षण प्राप्त कर रहे थे।

विद्यार्थियों के भविष्य पर संकट

अभिभावकों का कहना है कि विद्यालय की लापरवाही और नियमों की अनदेखी के कारण पांचों विद्यार्थियों का शैक्षणिक भविष्य संकट में पड़ गया है। एक परीक्षा छूट जाने से वे इस वर्ष कक्षा दसवीं की परीक्षा में शामिल नहीं हो सकेंगे। यह मामला शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता, विद्यालयों की जवाबदेही और विद्यार्थियों के भविष्य की सुरक्षा को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।

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