भुवनेश्वर :केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि महाप्रभु श्रीजगन्नाथ सामाजिक समरसता और न्याय के सर्वोच्च प्रतीक हैं, जिनके समक्ष जाति, वर्ग या आर्थिक स्थिति का कोई भेद नहीं है। वे सभी को समान रूप से स्वीकार करते हैं।श्री प्रधान ने यह बातें नई दिल्ली के हौज खास स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर परिसर में आयोजित समारोह में कही, जहां “भगवान जगन्नाथ: अध्यात्म और विज्ञान का अद्वितीय संगम” पुस्तक के हिंदी और अंग्रेज़ी संस्करण का लोकार्पण किया गया। यह पुस्तक श्री भागीरथी झा द्वारा लिखित है। केन्द्रीय शिक्षा मंत्री के कार्यालय द्वारा यह जानकारी दी गई है ।
केंद्रीय मंत्री ने पुस्तक की सराहना करते हुए कहा कि यह ग्रंथ महाप्रभु श्रीजगन्नाथ की संस्कृति, परंपराओं और उनके पीछे निहित वैज्ञानिक दृष्टिकोण को अत्यंत सरल और प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करता है। उन्होंने कहा कि श्रीजगन्नाथ संस्कृति केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं, बल्कि विज्ञान और अध्यात्म का दुर्लभ संगम है। उन्होंने इसे पवित्र जगन्नाथ मंदिर में लोकार्पित किया जाना सौभाग्य की बात बताया।
श्री प्रधान ने कहा कि पुरी गोवर्धन पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती जी के मार्गदर्शन में रचित यह ग्रंथ जगन्नाथ तत्व को जनमानस तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि बलराम दास द्वारा रचित लक्ष्मीपुराण में सदियों पहले महिला सशक्तिकरण, स्वच्छता और सामाजिक समानता का जो संदेश दिया गया था, वही आज आधुनिक सरकारी नीतियों में प्रतिबिंबित हो रहा है। उन्होंने महाप्रभु के महाप्रसाद को संतुलित आहार प्रणाली का उदाहरण बताते हुए कहा कि रथयात्रा और महाप्रसाद की परंपरा सामाजिक समानता की जीवंत मिसाल है।
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