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Sanjay Lath, President

केंद्रीय बजट से पेट्रोलियम क्षेत्र को वित्तीय स्थिरता और विकास की नई दिशा: संजय लाठ

  •  कहा- निवेश, कर स्थिरता और डिजिटल सुधारों से डीलर्स का भरोसा मजबूत

भुवनेश्वर। केंद्रीय बजट 2026-27 पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए ऑल इंडिया पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के महासचिव संजय लाठ ने कहा कि यह बजट पेट्रोलियम और ऊर्जा क्षेत्र के लिए वित्तीय संतुलन, दीर्घकालिक स्थिरता और कारोबारी भरोसे को मजबूत करने वाला है। उन्होंने कहा कि बजट में राजकोषीय अनुशासन बनाए रखते हुए बुनियादी ढांचे, लॉजिस्टिक्स और ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को सुदृढ़ करने पर विशेष ध्यान दिया गया है, जिससे पूरे क्षेत्र को स्थायित्व मिलेगा।

उन्होंने कहा कि भंडारण, परिवहन और वितरण नेटवर्क में प्रस्तावित निवेश से ईंधन आपूर्ति प्रणाली अधिक कुशल बनेगी। इससे परिचालन लागत में कमी आएगी, कार्यशील पूंजी पर दबाव घटेगा और पेट्रोलियम डीलर्स की कैश-फ्लो स्थिति में सुधार होगा। उन्होंने इसे खुदरा ईंधन कारोबार के लिए वित्तीय रूप से सकारात्मक कदम बताया।

डिजिटल भुगतान और आसान फाइनेंसिंग से कारोबार को गति

संजय लाठ ने बजट में डिजिटल भुगतान, बैंकिंग सुधार और एमएसएमई क्रेडिट से जुड़े प्रावधानों की सराहना करते हुए कहा कि इससे पेट्रोलियम डीलर्स को तेज, पारदर्शी और सुरक्षित लेन-देन की सुविधा मिलेगी। बेहतर क्रेडिट एक्सेस, ब्याज लागत में संभावित कमी और वित्तीय संस्थानों की बढ़ती भागीदारी से डीलर्स के लिए पूंजी प्रबंधन आसान होगा और कारोबारी जोखिम घटेगा।

उन्होंने कहा कि वित्तीय समावेशन और डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर के विस्तार से खुदरा ईंधन क्षेत्र में निवेश का माहौल मजबूत होगा और छोटे व मध्यम डीलर्स को भी विकास के समान अवसर मिलेंगे।

कर स्थिरता से वित्तीय जोखिम में कमी

संजय लाठ ने कहा कि बजट में कर ढांचे में निरंतरता और नीतिगत स्पष्टता बनाए रखने से पेट्रोलियम क्षेत्र में मूल्य पूर्वानुमेयता बढ़ेगी। इससे इन्वेंट्री प्लानिंग, नकदी प्रबंधन और दीर्घकालिक वित्तीय निर्णय अधिक सटीक ढंग से लिए जा सकेंगे। उन्होंने कहा कि कर प्रणाली में स्थिरता से डीलर्स के वित्तीय जोखिम कम होंगे और व्यवसाय अधिक सुरक्षित बनेगा।

हरित ऊर्जा संक्रमण के साथ वित्तीय संतुलन

उन्होंने यह भी कहा कि बजट में पारंपरिक ईंधन के साथ वैकल्पिक और हरित ऊर्जा की ओर संतुलित और चरणबद्ध संक्रमण की नीति अपनाई गई है। इससे पेट्रोलियम डीलर्स पर अचानक पूंजी निवेश का दबाव नहीं पड़ेगा और उन्हें अपने कारोबारी मॉडल को धीरे-धीरे अनुकूलित करने का अवसर मिलेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि यह संतुलन पेट्रोलियम क्षेत्र की वित्तीय मजबूती और दीर्घकालिक स्थिरता को सुनिश्चित करेगा।

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