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अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को लेकर ओडिशा कैबिनेट का बड़ा फैसला

  •   दुबई और सिंगापुर को सब्सिडी जारी, अन्य रूट्स से समर्थन वापस

  •   वैश्विक कनेक्टिविटी बनाए रखने और संसाधनों के संतुलित उपयोग पर जोर

भुवनेश्वर। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी की अध्यक्षता में शनिवार को हुई ओडिशा कैबिनेट बैठक में अंतरराष्ट्रीय हवाई संपर्क को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। कैबिनेट ने भुवनेश्वर से संचालित कुछ चुनिंदा अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए राज्य व्यवहार्यता अंतर भरपाई सहायता को जारी रखने और अन्य रूट्स के लिए इसे वापस लेने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसका उद्देश्य वैश्विक कनेक्टिविटी बनाए रखना, प्रवासी ओड़िया समुदाय को सुविधा देना और विमानन आधारित आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है।

राज्य सरकार के वाणिज्य एवं परिवहन विभाग द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव के अनुसार, वर्तमान में इंडिगो एयरलाइंस द्वारा संचालित भुवनेश्वर-दुबई और भुवनेश्वर-सिंगापुर अंतरराष्ट्रीय रूट्स को राज्य की सहायता जारी रहेगी। इन दोनों उड़ानों की शुरुआत पहले राज्य सहायता के साथ की गई थी, ताकि शुरुआती व्यावसायिक घाटे की भरपाई की जा सके।

भुवनेश्वर-दुबई उड़ान के लिए छह माह की अतिरिक्त सहायता

प्रस्ताव के तहत भुवनेश्वर-दुबई रूट के लिए विंटर शेड्यूल 2025 (27 अक्टूबर 2025 से 29 मार्च 2026) के दौरान अगले छह महीनों तक सहायता जारी रखने की सिफारिश की गई है। अधिकारियों के अनुसार, पहले दी गई सहायता हटने के बाद यात्री संख्या में तेज गिरावट देखी गई थी, जिससे इस रूट के बंद होने की आशंका पैदा हो गई थी।

राज्य की नई डेस्टिनेशन नीति के तहत इस सहायता को जारी रखने का प्रस्ताव रखा गया है, ताकि सीधी अंतरराष्ट्रीय उड़ान बाधित न हो।

सिंगापुर रूट को भी छह माह का सहारा

इसी तरह भुवनेश्वर-सिंगापुर रूट को भी अद्यतन लागत सूचकांक के साथ छह महीने की सहायता देने का प्रस्ताव मंजूर किया गया है। रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होने के बावजूद यह रूट कम यात्री भार और अधिक परिचालन लागत के कारण व्यावसायिक चुनौतियों का सामना कर रहा है, जिससे राज्य के हस्तक्षेप की आवश्यकता बनी हुई है।

दो अंतरराष्ट्रीय रूट्स से सहायता वापस

संसाधनों के बेहतर उपयोग और प्राथमिक रूट्स को स्थिर करने के उद्देश्य से सरकार ने दो अंतरराष्ट्रीय उड़ानों, भुवनेश्वर-बैंकॉक रूट पर 27 अक्टूबर 2025 से तथा भुवनेश्वर-अबू धाबी रूट पर 11 दिसंबर 2025 से सहायता वापस लेने का निर्णय लिया है।

सरकार का कहना है कि यह कदम सार्वजनिक धन के विवेकपूर्ण उपयोग और अधिक प्रभावी रूट्स को मजबूत करने के लिए उठाया गया है।

दुबई और सिंगापुर की रणनीतिक अहमियत

अधिकारियों ने बताया कि दुबई ओडिशा के प्रवासी श्रमिकों का एक प्रमुख केंद्र है और सीधी उड़ान न होने पर उन्हें अन्य महानगरों के जरिए यात्रा करनी पड़ती है। वहीं सिंगापुर ओडिशा के लिए व्यापार, निवेश और संस्थागत सहयोग का एक महत्वपूर्ण साझेदार बना हुआ है।

बी-मान योजना के तहत विमानन हब बनने की तैयारी

अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को बनाए रखना एयरपोर्ट स्लॉट्स सुरक्षित रखने, रूट्स को स्थिर करने और बी-मान योजना के तहत ओडिशा को एक क्षेत्रीय विमानन केंद्र के रूप में विकसित करने के लक्ष्य के लिए भी आवश्यक माना जा रहा है।

26.87 करोड़ रुपये का प्रस्तावित व्यय

दुबई और सिंगापुर रूट्स के लिए छह माह की अवधि में प्रस्तावित कुल सहायता राशि लगभग 26.87 करोड़ रुपये आंकी गई है। यह व्यय बी-मान योजना के तहत स्वीकृत बजटीय प्रावधान से वहन किया जाएगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में किसी भी अंतरराष्ट्रीय रूट की निरंतरता, बदलाव या विस्तार का निर्णय मुख्यमंत्री स्तर पर, समय-समय पर रूट की व्यावहारिकता और यात्री मांग की समीक्षा के आधार पर लिया जाएगा।

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