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ओडिशा में मुख्यमंत्री मोहन माझी ने समीक्षा पोर्टल का किया शुभारंभ
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समीक्षा पोर्टल से बढ़ेगी पारदर्शिता और जवाबदेही
भुवनेश्वर। अब सरकारी योजनाओं और विकास परियोजनाओं की प्रगति जानने के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। ओडिशा में पारदर्शी और जवाबदेह शासन की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने समीक्षा पोर्टल का शुभारंभ किया है। इस डिजिटल पहल के जरिए अब आम नागरिक भी केंद्र और राज्य वित्त आयोग की अनुदान योजनाओं से चल रही परियोजनाओं की वास्तविक समय में निगरानी कर सकेंगे, जिससे सरकारी कार्यप्रणाली में पारदर्शिता के साथ-साथ जवाबदेही भी और मजबूत होगी।
इस पोर्टल के माध्यम से सड़कों का निर्माण, पेयजल आपूर्ति, स्वच्छता, स्ट्रीट लाइट, पार्क और अन्य सामुदायिक सुविधाओं से जुड़ी परियोजनाओं की प्रगति को आसानी से देखा जा सकेगा।
अब आम नागरिक, जनप्रतिनिधि और कोई भी इच्छुक व्यक्ति इन परियोजनाओं की निगरानी कर सकेगा।
मजबूत ओडिशा की नींव रखने पर जोर
बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे राज्य के आर्थिक संकेतकों में सुधार, पंचायत स्तर पर प्रशासनिक ढांचे के सशक्तीकरण, लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने और हर गांव व शहरी क्षेत्र के समग्र विकास पर विशेष ध्यान दें।
उन्होंने कहा कि एक समृद्ध और विकसित ओडिशा के लिए मजबूत बुनियाद तैयार करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
मुख्यमंत्री को छठे राज्य वित्त आयोग ने अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपी
ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी को छठे राज्य वित्त आयोग ने अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपी। लोक सेवा भवन में आयोजित कार्यक्रम में आयोग के अध्यक्ष अरुण कुमार पंडा के नेतृत्व में आयोग के सदस्यों ने यह विस्तृत रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपते हुए राज्य में स्थानीय स्वशासन संस्थाओं की वित्तीय संरचना को सशक्त बनाने से जुड़े सुझाव प्रस्तुत किए। इसी दौरान समीक्षा पोर्टल का शुभारंभ किया गया।
पंचायत और शहरी निकायों के लिए संतुलित वित्तीय ढांचा
मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, आयोग की सिफारिशें समानता के सिद्धांत पर आधारित हैं और इनमें क्षेत्रीय असमानताओं को कम करने, ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों की अलग-अलग जरूरतों को ध्यान में रखते हुए उपाय सुझाए गए हैं।
समग्र विकास के लिए वित्तीय और गैर-वित्तीय सुझाव
रिपोर्ट में पंचायती राज संस्थाओं और शहरी स्थानीय निकायों के समग्र विकास के लिए वित्तीय और गैर-वित्तीय दोनों तरह के सुझाव शामिल हैं। गौरतलब है कि आयोग ने यह रिपोर्ट इससे पहले 21 जनवरी को राज्यपाल हरि बाबू कंभमपाटी को भी सौंपी थी।
इस बैठक में उपमुख्यमंत्री केवी सिंहदेव, मुख्य सचिव अनु गर्ग, विकास आयुक्त डीके सिंह, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव शाश्वत मिश्र, वित्त विभाग के प्रधान सचिव संजीव मिश्र, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी सचिव विशाल देव तथा पंचायती राज एवं पेयजल सचिव गिरीश एसएन सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
छठे राज्य वित्त आयोग का गठन और कार्य
छठे राज्य वित्त आयोग का गठन 22 जनवरी 2025 को किया गया था। आयोग को स्थानीय निकायों की वित्तीय स्थिति की समीक्षा, राज्य सरकार और त्रि-स्तरीय पंचायती राज संस्थाओं एवं शहरी निकायों के बीच करों, शुल्कों और उपकरों के वितरण के सिद्धांत तय करने तथा उनकी वित्तीय सेहत मजबूत करने के उपाय सुझाने का दायित्व सौंपा गया था। पिछले एक वर्ष में आयोग ने विभिन्न विभागों, जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और विशेषज्ञों के साथ व्यापक विचार-विमर्श किया। साथ ही जिलों, विभागों और आम जनता से सुझाव भी आमंत्रित किए गए।
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