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चिलिका झील का होगा विकास, मिलेगा नया स्वरूप

  •     राज्य सरकार ने 2000 करोड़ रुपये के डीपीआर के साथ नई योजना की घोषणा की

  •     संरक्षण और पर्यटन को मिलेगी नई दिशा

भुवनेश्वर। ओडिशा सरकार ने एशिया की सबसे बड़ी खारे पानी की झील चिलिका के संरक्षण और समग्र विकास के लिए एक नई महत्वाकांक्षी योजना का ऐलान किया है। शनिवार को भुवनेश्वर में हुई उच्चस्तरीय बैठक में चिलिका झील की जैव विविधता की रक्षा, गाद की समस्या और आसपास के क्षेत्रों के विकास को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक की अध्यक्षता कानून, लोक निर्माण एवं आबकारी मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने की।

विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार

मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने बताया कि चिलिका को “नया स्वरूप” देने के लिए 1500 से 2000 करोड़ रुपये की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जा रही है। इस योजना में उन्नत बुनियादी ढांचे के विकास के साथ-साथ वैज्ञानिक तरीके से पारिस्थितिकी संरक्षण पर जोर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस परियोजना के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मद्रास के साथ सहयोग किया जा रहा है, ताकि गाद जमाव जैसी गंभीर समस्याओं का स्थायी समाधान निकाला जा सके।

गाद जमाव सबसे बड़ी चुनौती

चिलिका झील की गहराई वर्तमान में 0.38 मीटर से 6.20 मीटर के बीच है, लेकिन नदियों और नहरों के माध्यम से हर साल करीब 8 लाख टन गाद झील में पहुंच रही है। इससे धीरे-धीरे झील भरने का खतरा बढ़ रहा है। प्रस्तावित वैज्ञानिक डीपीआर का मुख्य उद्देश्य इसी गाद जमाव को रोकना और झील की प्राकृतिक गहराई को बहाल करना है, ताकि जैव विविधता सुरक्षित रह सके।

पर्यटन और नौवहन को मिलेगा बढ़ावा

योजना के तहत चिलिका के चारों ओर के क्षेत्रों का विकास किया जाएगा और पूरे इलाके को अवरोधमुक्त बनाया जाएगा। इससे नौवहन सुगम होगा और पर्यटन को नई गति मिलेगी। फेरी सेवाओं, पर्यटक सुविधाओं और बुनियादी ढांचे के सुदृढ़ीकरण से देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करने का लक्ष्य रखा गया है।

मछुआरों की आजीविका और जैव संतुलन पर फोकस

चिलिका केवल पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि दो लाख से अधिक मछुआरों की जीवनरेखा है। यह इरावदी डॉल्फिन का प्राकृतिक आवास और एशिया व यूरोप से आने वाले प्रवासी पक्षियों का प्रमुख शीतकालीन ठिकाना भी है। योजना के तहत स्वस्थ जलीय पारिस्थितिकी सुनिश्चित कर मत्स्य उत्पादन बढ़ाया जाएगा, जिससे स्थानीय समुदायों की आय और आजीविका को मजबूती मिलेगी।

राष्ट्रीय और वैश्विक पहचान को और सशक्त करने का लक्ष्य

रामसर स्थल के रूप में मान्यता प्राप्त चिलिका को जलीय पारिस्थितिकी संरक्षण की राष्ट्रीय योजना के तहत भी धनराशि मिलती है। सरकार का उद्देश्य इन संसाधनों का प्रभावी उपयोग कर चिलिका की वैश्विक पहचान को और मजबूत करना है, ताकि इसे एशिया की सबसे बड़ी खारे पानी की झील और जैव विविधता के अंतरराष्ट्रीय केंद्र के रूप में नई ऊंचाई मिले।

जलवायु परिवर्तन भी एक बड़ी चुनौती

बैठक में यह भी माना गया कि समुद्र स्तर में वृद्धि और अनियमित मानसून जैसी जलवायु चुनौतियां पुनर्स्थापन कार्यों को जटिल बना सकती हैं। ऐसे में विकास और संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना इस योजना की सबसे बड़ी कसौटी होगी।

इस उच्चस्तरीय बैठक में पुरी के सांसद संबित पात्र, वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के प्रधान सचिव भास्कर ज्योति शर्मा, आईआईटी मद्रास की प्रोफेसर नीलांजना साहा, चिलिका विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी योगजया नंदा और चिलिका के वन मंडल अधिकारी अमलान नायक सहित कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। सरकार की यह नई पहल पर्यटन से आर्थिक विकास और दीर्घकालिक पारिस्थितिकी संरक्षण के बीच संतुलन साधने की दिशा में एक निर्णायक कदम मानी जा रही है।

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