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रथयात्रा 2026 से पहले पूरी की जाएगी बहुप्रतीक्षित सूची प्रक्रिया: कानून मंत्री
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उच्चस्तरीय बैठक में एसओपी पर हुई विस्तृत चर्चा
पुरी। ओडिशा के पुरी स्थित श्रीजगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार की बहुप्रतीक्षित गणना और सूचीकरण की प्रक्रिया तीन चरणों में पूरी की जाएगी और इसे रथयात्रा 2026 से काफी पहले समाप्त करने का लक्ष्य रखा गया है। यह जानकारी रविवार को राज्य के कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने दी।
कानून मंत्री ने बताया कि देवताओं के आभूषणों और बहुमूल्य वस्तुओं की गिनती व सूची तैयार करने के लिए तैयार किया गया मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लगभग अंतिम चरण में है। इस एसओपी पर एक उच्चस्तरीय समिति की बैठक में विस्तार से चर्चा की गई है। उन्होंने कहा कि समिति जल्द ही एसओपी को राज्य सरकार को मंजूरी के लिए सौंपेगी, और स्वीकृति मिलते ही रत्न भंडार की गणना प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
पूजा और दर्शन नहीं होगा बाधित
मंत्री ने स्पष्ट किया कि पूरी प्रक्रिया इस तरह से संचालित की जाएगी कि मंदिर की दैनिक पूजा-पद्धति और आम श्रद्धालुओं के दर्शन किसी भी तरह से प्रभावित न हों। गणना के दौरान श्रद्धालुओं को नाटमंडप स्थित ‘बाहारकठा’ से भगवान जगन्नाथ के दर्शन की अनुमति दी जाएगी, ताकि भक्तों को असुविधा न हो।
11 पन्नों की मार्गदर्शिका तैयार
रत्न भंडार निगरानी समिति द्वारा तैयार की गई 11 पन्नों की मार्गदर्शिका के अनुसार, सूचीकरण की प्रक्रिया तीन चरणों में पूरी होगी। पहले चरण में भगवानों द्वारा नियमित रूप से उपयोग किए जाने वाले आभूषणों की गणना की जाएगी। इसके बाद दूसरे चरण में रत्न भंडार के बाहरी कक्ष में रखी बहुमूल्य वस्तुओं की सूची तैयार होगी, जबकि तीसरे और अंतिम चरण में आंतरिक कक्ष में सुरक्षित वस्तुओं की गिनती की जाएगी।
सुरक्षा और पारदर्शिता के लिए विशेष व्यवस्था
गणना प्रक्रिया के दौरान सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। रत्न भंडार की सूची में शामिल सेवायतों को पहचान पत्र जारी किए जाएंगे और गिनती के समय मौजूद प्रत्येक व्यक्ति की विस्तृत सूची तैयार की जाएगी। पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा नामित दो अधिकारी भी इस प्रक्रिया में शामिल होंगे।
वीडियोग्राफी, डिजिटलीकरण और 1978 की सूची से मिलान
पूरी गणना प्रक्रिया की वीडियोग्राफी की जाएगी और कैमरों की चिप्स को सुरक्षित रखा जाएगा। सभी आभूषणों का डिजिटलीकरण किया जाएगा और उनकी तुलना 1978 में तैयार की गई मौजूदा सूची से की जाएगी, ताकि किसी भी तरह की त्रुटि की संभावना न रहे। आंतरिक कक्ष की प्रतिदिन की गणना के बाद उसकी चाबियां जिला कोषागार में जमा कराई जाएंगी।
श्रद्धालुओं में बढ़ी उम्मीद
रत्न भंडार की गणना को लेकर वर्षों से चली आ रही प्रतीक्षा के बीच इस घोषणा को ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। श्रद्धालुओं और सेवायतों को उम्मीद है कि पारदर्शी और सुव्यवस्थित प्रक्रिया से रत्न भंडार से जुड़ी सभी शंकाओं का समाधान होगा और मंदिर की परंपराओं की गरिमा भी बनी रहेगी।
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