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भुवनेश्वर के रूफटॉप बार में लगी भीषण आग

  •     सुरक्षा मानकों पर उठे गंभीर सवाल

  •     नो-लिमिट रेस्टोरेंट में अवैध शराब-हुक्का कारोबार के दावे

  •     अधिकारियों को कथित कैश भुगतान के दस्तावेज सोशल मीडिया में सामने आए

भुवनेश्वर। राजधानी भुवनेश्वर के सत्य विहार स्थित एक रूफटॉप बार में शुक्रवार सुबह अचानक भीषण आग भड़क उठी, जिसने कुछ ही मिनटों में पूरे ढांचे को अपनी चपेट में ले लिया। आग और धुआं दूर तक दिखाई दे रहे थे, जिससे पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई। शहर में व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में आग से सुरक्षा को लेकर पहले से उठ रहे सवालों को इस घटना ने और गहरा कर दिया है, विशेषकर गोवा के नाइटक्लब हादसे के बाद देशभर में सुरक्षा मानकों पर चल रही चर्चाओं के बीच।

एक घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू

सुबह करीब 8:45 बजे आग लगने की सूचना मिलते ही दमकल विभाग हरकत में आया और सात फायर टेंडर तथा करीब 30 अधिकारियों को घटनास्थल पर भेजा गया। आग इतनी तीव्र थी कि करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद ही उसे नियंत्रित किया जा सका। मौके पर एम्बुलेंस भी तैनात की गई थी। उप–अग्निशमन अधिकारी नारायण दास ने बताया कि आग का कारण प्रथम दृष्टया शॉर्ट सर्किट प्रतीत होता है और सौभाग्य से किसी तरह की जनहानि नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि नियमों के अनुसार विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है।

सुरक्षा मानकों पर जांच, रूफटॉप संरचना ने बढ़ाई मुश्किलें

आग लगने के समय रेस्टोरेंट बंद था, यह दावा उसके मालिक ने किया है। हालांकि यह बात जांच का विषय बनी हुई है कि प्रतिष्ठान में फायर एक्सटिंग्विशर, आपातकालीन निकास और विद्युत सुरक्षा जैसी अनिवार्य व्यवस्था मौजूद थी या नहीं। रूफटॉप पर बने होने के कारण आग बुझाने और संभावित निकासी की प्रक्रिया और भी जटिल मानी जा रही है।

अवैध गतिविधियों का खुलासा

आगजनी की घटना के बाद रेस्टोरेंट के कामकाज को लेकर बड़े खुलासे हुए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यह प्रतिष्ठान केवल रेस्टोरेंट के तौर पर पंजीकृत था, जबकि इसके अंदर अवैध रूप से शराब और हुक्का परोसा जा रहा था। किसी भी प्रकार का बार लाइसेंस या हुक्का सर्विस की अनुमति उपलब्ध नहीं थी। इसके बावजूद गतिविधियां लंबे समय से निर्बाध रूप से चलती रहीं।

हस्तलिखित लेजर से सामने आए चौंकाने वाले भुगतान

एक मीडिया द्वारा प्राप्त हस्तलिखित लेजर ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है। इस लेजर में कथित रूप से बीएमसी अधिकारियों और स्थानीय पुलिस सहित विभिन्न विभागों के कर्मियों को नियमित रूप से नकद भुगतान का उल्लेख है। इसमें पीसीआर वैन को 500 रुपये और बीएमसी अधिकारियों को 6,000 रुपये देने की प्रविष्टियां दर्ज हैं। इन भुगतानों के लिए कोई रसीद, टोकन या बिल उपलब्ध नहीं मिला, जिससे इनके उद्देश्य और वैधता को लेकर गंभीर संदेह पैदा हो गया है।

कैसे चल रहा था बिना लाइसेंस का बार?

स्थानीय लोगों का कहना है कि रेस्टोरेंट में देर रात तक शराब और हुक्का खुलेआम परोसे जाते थे, जबकि किसी भी प्रकार की एक्साइज अनुमति हासिल नहीं थी। यह सवाल अब और तीखे हो गए हैं कि बिना अनुमति वाला प्रतिष्ठान कैसे इतने लंबे समय तक संचालन करता रहा और किसकी मिलीभगत से नियमों की अनदेखी की गई।

विस्तृत जांच शुरू, कई विभागों की भूमिका की जांच होगी

घटना ने प्रशासन को चौकन्ना कर दिया है। फायर सर्विसेज विभाग ने संरचनात्मक खामियों, सुरक्षा मानकों के पालन, एक्साइज नियमों के उल्लंघन और पुलिस तथा बीएमसी की भूमिका की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में ऐसे हादसों से बचने के लिए सभी मनोरंजन स्थलों में कठोर सुरक्षा ऑडिट आवश्यक हैं और नियमों के उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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