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ओडिशा में तटीय सुरक्षा को मिली नई ताकत

  •     चौकसी के लिए 10 अत्याधुनिक ड्रोन, 3 हाई-स्पीड ट्रॉलर तैनात

  •     विशेष रूप से प्रशिक्षित 140 पुलिसकर्मियों की हुई नियुक्ति

  •     ओडिशा पुलिस की एकदिवसीय कार्यशाला में रेल व तटीय सुरक्षा पर गहन मंथन

  •     तकनीकी जांच, साइबर सुरक्षा और समुद्री कानूनों पर विशेषज्ञों ने साझा किए विचार

भुवनेश्वर। ओडिशा में तटीय सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। तटवर्ती क्षेत्रों की चौकसी के लिए 10 अत्याधुनिक ड्रोन, 3 हाई-स्पीड ट्रॉलर और 140 विशेष रूप से प्रशिक्षित पुलिसकर्मियों की नियुक्ति की गई है। इसके साथ ही, जल्द ही एक अत्याधुनिक कमांड एंड कंट्रोल सेंटर भी स्थापित किया जाएगा, जिससे समुद्री सीमाओं पर किसी भी संदिग्ध गतिविधि की रियल-टाइम निगरानी संभव होगी।

यह जानकारी ओडिशा पुलिस के महानिदेशक योगेश बहादुर खुरानिया ने आज दी।

ओडिशा पुलिस के तत्वावधान में आज भुवनेश्वर स्थित पुलिस भवन में रेल और तटीय सुरक्षा को और अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से पुलिस अधिकारियों के लिए एकदिवसीय कौशल विकास कार्यशाला आयोजित की गई। इस कार्यशाला का उद्घाटन ओडिशा पुलिस के महानिदेशक योगेश बहादुर खुरानिया ने किया।

इस कार्यशाला में अधिकारियों की व्यावसायिक दक्षता, कार्यकुशलता, रेल और तटीय सुरक्षा की चुनौतियां, अपराध जांच में तकनीकी ज्ञान की भूमिका, साइबर अपराध, आधुनिक जांच पद्धतियां और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई।

कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए डीजीपी खुरानिया ने कहा कि यह कार्यशाला रेल और तटीय सुरक्षा की क्षमता को बढ़ाने में अत्यंत सहायक सिद्ध होगी। उन्होंने कहा कि ओडिशा पुलिस अपने मानव संसाधन, आधुनिक प्रौद्योगिकी और कार्यशैली में निरंतर सुधार लाने के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ओडिशा पुलिस को देश की सबसे आधुनिक और सक्षम पुलिस संगठनों में से एक बनाने के लिए हर संभव सहायता और सहयोग प्रदान कर रही है। डीजीपी ने कहा कि प्रभावी पुलिस सेवा के लिए कर्मियों में व्यावसायिक दक्षता, समय पर तैयारी और समन्वय होना अत्यंत आवश्यक है।

डीजीपी ने कहा कि ओडिशा का लंबा समुद्रतट राज्य की तटीय सुरक्षा के लिए बेहद संवेदनशील है। राज्य सरकार ने इस सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 149.95 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की है।

बंदरगाहों और फिशिंग हार्बरों की होगी सीसीटीवी से निगरानी

उन्होंने बताया कि राज्य के 32 मछली पकड़ने वाले बंदरगाहों और फिशिंग हार्बरों को सीसीटीवी निगरानी प्रणाली से जोड़ने का कार्य प्रगति पर है, जबकि नई नौकाओं की खरीद प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है।

डीजीपी ने कहा कि रेल पुलिस को अधिक आधुनिक बनाने के लिए नए रेल पुलिस जिले और जीपीआरएस इकाइयों की स्थापना की प्रक्रिया जारी है। इसके अलावा, राज्य के सभी 15 जीपीआरएस केंद्रों में सीसीटीवी मॉनिटरिंग सिस्टम स्थापित करने के लिए भी बजट स्वीकृत किया गया है।

फोरेंसिक ज्ञान और कौशल के उपयोग पर प्रस्तुति

कार्यशाला में डॉ केशव कुमार, आईपीएस (सेवानिवृत्त डीजीपी, गुजरात) ने अपराध जांच में फोरेंसिक ज्ञान और कौशल के उपयोग” विषय पर प्रस्तुति दी और अपने अनुभव साझा किए।

इसके अलावा, भारतीय कोस्ट गार्ड के कमांडेंट रवींद्र कुमार ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा कानूनों पर विस्तृत प्रस्तुति दी।

प्रभावी तटीय सुरक्षा की आवश्यकता पर बल

कार्यक्रम में अरुण बोथरा, अतिरिक्त डीजीपी (रेल और तटीय सुरक्षा) ने स्वागत भाषण देते हुए व्यावसायिक दक्षता, समय पर तैयारी और प्रभावी तटीय सुरक्षा की आवश्यकता पर बल दिया। आलोक बोहरा, आईजीपी, आरपीएफ ने विभिन्न एजेंसियों और खुफिया संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय और सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया। कार्यक्रम का समापन एआईजी (रेल और तटीय सुरक्षा) सत्यजीत मिश्र द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। इस कार्यशाला में राज्य के सभी सरकारी रेल और समुद्री थाना अधिकारियों ने भाग लिया।

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