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ओडिशा में 1000 करोड़ रुपये के पोंजी घोटाले का पर्दाफाश

  •        राज्य प्रमुख प्रताप कुमार राउत गिरफ्तार

  •        ईओडब्ल्यू ने की बड़ी कार्रवाई

  •        12 हजार निवेशकों से 139 करोड़ की ठगी

  •        10 राज्यों में फैला था नेटवर्क

भुवनेश्वर। ओडिशा पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने ओडिशा में 1000 करोड़ रुपये के पोंजी घोटाले का पर्दाफाश किया है। इसके साथ ही शनिवार को प्रताप कुमार राउत नामक एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है, जो एक मल्टी-स्टेट इन्वेस्टमेंट कंपनी का ओडिशा प्रमुख था। आरोप है कि राउत और उसकी कंपनी ने देशभर के हजारों निवेशकों से 1000 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की है। इनमें से ओडिशा के 12,000 से अधिक निवेशकों से लगभग 139 करोड़ रुपये वसूले गए थे।

सेवानिवृत्त व्यक्ति से 92 लाख की ठगी

मामले की शुरुआत विजय कुमार पाणिग्राही की शिकायत से हुई, जिन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति की 92.6 लाख रुपये की बचत कंपनी में निवेश कर दी। प्रताप राउत ने उन्हें 11 से 18 प्रतिशत मासिक रिटर्न का लालच दिया था और दावा किया था कि फंड विदेशी मुद्रा बाजार में निवेश किया जा रहा है।

शिकायत के अनुसार, पाणिग्राही ने राउत द्वारा दिए गए खातों में कई बार धनराशि जमा की। लेकिन कुछ समय बाद कंपनी ने भुगतान रोक दिया, वेबसाइट बंद कर दी और संपर्क काट लिया।

कई राज्यों में फैला जाल

ईओडब्ल्यू की जांच में सामने आया कि यह कंपनी 2023 में गोवा के रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज में पंजीकृत थी और आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, असम, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, तमिलनाडु, दिल्ली और ओडिशा सहित 10 राज्यों में सक्रिय थी।

कंपनी ने कटक और भुवनेश्वर में प्रचारक बैठकों के जरिए निवेशकों को जोड़ा और उन्हें उच्च ब्याज व सुरक्षित निवेश का झांसा दिया। शुरुआत में कुछ ब्याज देकर भरोसा जीता गया और फिर अचानक कंपनी बंद कर दी गई।

हवाला चैनलों से फंड ट्रांसफर

ईओडब्ल्यू के सूत्रों के अनुसार, प्रताप राउत राज्य के मुख्य फंड कलेक्टर के रूप में काम कर रहा था। उसने कई बैंक खातों का इस्तेमाल किया, जिनमें कुछ तीसरे पक्षों के नाम पर थे। जमा राशि को हवाला नेटवर्क के माध्यम से भी ट्रांसफर किया जाता था। वह बार-बार खाते बदलता था, ताकि जांच एजेंसियों से बच सके और बड़ी मात्रा में नकद लेनदेन भी करता था।

अन्य आरोपियों की तलाश जारी

ईओडब्ल्यू ने बताया कि फिलहाल पैसे की ट्रांजेक्शन श्रृंखला (मनी ट्रायल) और अन्य सहयोगियों व कंपनियों की भूमिका की जांच की जा रही है। अधिकारियों ने संकेत दिया है कि जल्द ही और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

हाल के वर्षों का सबसे बड़ा निवेश घोटाला

बताया गया है कि यह मामला ओडिशा में हाल के वर्षों का सबसे बड़ा निवेश घोटाला माना जा रहा है, जिसने हजारों निवेशकों की मेहनत की कमाई को डूबो दिया।

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