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पीतावास हत्याकांड में पूर्व पार्षद और छात्र नेता सहित 10 संदिग्ध हिरासत में

  •     पुलिस की बहुराज्यीय जांच में कई अहम सुराग

  •     यूपीआई लेनदेन से जुड़ रही है साजिश की कड़ी

ब्रह्मपुर। वरिष्ठ अधिवक्ता और भाजपा नेता पीतावास पंडा हत्याकांड में पुलिस ने जांच में बड़ी प्रगति की है। ब्रह्मपुर पुलिस ने शुक्रवार को इस मामले में एक पूर्व पार्षद, एक छात्र नेता और कई अन्य संदिग्धों को हिरासत में लिया है। सूत्रों के अनुसार, अब तक आठ से दस लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में रखा गया है, जिनमें कुछ का आपराधिक रिकॉर्ड भी है।

पिछले दो दिनों में पुलिस ने एक पूर्व पार्षद और छात्र नेता को हिरासत में लेकर लंबी पूछताछ की है। बताया जा रहा है कि इन दोनों का संबंध एक राजनीतिक दल से है। इसके अलावा ओडिशा, बिहार, दिल्ली, पश्चिम बंगाल और आंध्र प्रदेश से भी कई संदिग्धों को पकड़ा गया है। पुलिस इन सभी से यह जानने की कोशिश कर रही है कि हत्या की साजिश और उसके क्रियान्वयन में उनकी क्या भूमिका रही।

यूपीआई ट्रांजेक्शन से खुल रही साजिश की परतें

जांच में एक नया पहलू तब सामने आया जब पुलिस ने ऑनलाइन वित्तीय लेनदेन (यूपीआई ट्रांजेक्शन) की जांच शुरू की। एक ट्रांजेक्शन में ब्रह्मपुर के एक स्थानीय व्यक्ति द्वारा ओडिशा के बाहर कुछ लोगों को पैसे भेजे जाने की जानकारी मिली है। पुलिस को शक है कि यह लेनदेन हत्या की साजिश और उसकी फंडिंग से जुड़ा हो सकता है। इस सुराग के आधार पर जांच अब वित्तीय ट्रेल पर भी केंद्रित हो गई है।

कई राज्यों में फैली जांच

हत्या की गुत्थी सुलझाने के लिए पुलिस की टीमों ने बिहार, दिल्ली, कोलकाता और ओडिशा के कई जिलों में एक साथ जांच अभियान चलाया है। 16 अक्टूबर को बिहार से दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें से एक को मुख्य शूटर (हमलावर) और दूसरे को रेकी करने वाला सहयोगी बताया जा रहा है। दोनों को पूछताछ के लिए ब्रह्मपुर लाया गया है।

आवास के पास गोली मारकर हत्या

गौरतलब है कि भाजपा नेता पीतावास पंडा की 6 अक्टूबर की रात उनके कामापल्ली स्थित आवास के पास गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उन्हें नजदीक से गोली मारी गई थी और गंभीर रूप से घायल अवस्था में अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

पुलिस अब तक जुटाए गए सबूतों, फोन कॉल रिकॉर्ड, वित्तीय लेनदेन और संदिग्धों की गतिविधियों के आधार पर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि हत्या के पीछे राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता, निजी विवाद या कोई संगठित साजिश थी।

ब्रह्मपुर पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मामला बेहद संवेदनशील है, इसलिए हर कोण से जांच की जा रही है। आने वाले दिनों में कुछ और महत्वपूर्ण गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

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