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ओडिशा में बागवानी क्षेत्र में ऐतिहासिक क्रांति
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15 नई फसलों को मिली मंजूरी
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कृषि विभाग और वैज्ञानिक संस्थाओं की संयुक्त पहल से किसानों को उत्पादन और पोषण में नए अवसर
भुवनेश्वर। ओडिशा के बागवानी और कृषि क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव और ऐतिहासिक क्रांति देखने को मिली है। राज्य की बीज उप-समिति ने 15 नई बागवानी फसलों की वैरायटी को मंजूरी दी है। इस बैठक की अध्यक्षता कृषि और किसान सशक्तिकरण विभाग के प्रधान सचिव डॉ अरविंद कुमार पाढ़ी ने की।
जारी की गई नई किस्मों में ओयूएटी कलिंगा द्वारा विकसित आठ किस्में (मिर्च, बैंगन, चौलाई, टमाटर, काजू, आम, अदरक, काली हल्दी, आलू), केंद्रीय कंद फसल अनुसंधान संस्थान (सीटीसीआरआई) द्वारा विकसित दो किस्में (शकरकंद, रतालू), और केंद्रीय बागवानी प्रयोग केंद्र (सीएचईएस) द्वारा विकसित पाँच किस्में (गुलाब सेब, चौलाई की तीन किस्में, बैंगन) शामिल हैं।
इस पहल का उद्देश्य किसानों को उच्च गुणवत्ता वाली फसलें उपलब्ध कराना, उत्पादन बढ़ाना और पोषण में विविधता लाना है। नई वैराइटी में ओडिशा कृषि विश्वविद्यालय कलिंग द्वारा विकसित आठ फसलें शामिल हैं, जिनमें मिर्च, बैंगन, चौलाई, टमाटर, काजू, आम, अदरक, काली हल्दी और फूलबाणी आलू प्रमुख हैं। इसके अलावा केंद्रीय टयूबर्स फसल अनुसंधान संस्थान ने शकरकंद और यम बीन की नई वैरायटी विकसित की। केंद्रीय बागवानी प्रयोगशाला द्वारा विकसित पांच वैरायटी में सबसे विशेष है, रोज एप्पल, जिसे भारत में पहली बार किसानों के लिए पेश किया गया है। इसके अलावा तीन प्रकार की चौलाई और बैंगन की नई वैरायटी भी इस सूची में शामिल है।
विशेष रूप से रोज एप्पल का विकास भारतीय कृषि और बागवानी क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। कलिंग ब्लैक हल्दी-1 अपनी औषधीय गुणों और स्वास्थ्य लाभ के लिए जानी जाती है, जबकि फुलबाणी आलू अपने अनोखे स्वाद और उच्च गुणवत्ता के कारण किसानों और बाजार दोनों में लोकप्रिय है। अधिकारियों ने बताया कि इन नई फसलों से न केवल उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में किसानों के लिए नए अवसर भी खुलेंगे।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि इस पहल से ओडिशा में बागवानी क्षेत्र को नई दिशा मिलेगी और किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। साथ ही, यह कदम राज्य में फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने और किसानों को उच्च मूल्य वाली फसलें उगाने के लिए प्रेरित करने में भी सहायक साबित होगा।
ओडिशा सरकार ने इस परियोजना को कृषि क्षेत्र में नवाचार और वैज्ञानिक अनुसंधान के साथ जोड़ते हुए किसानों के लिए स्थायी और लाभकारी मॉडल तैयार करने के रूप में प्रस्तुत किया है। नई फसलें किसानों को बेहतर उत्पादन, पोषण और आय के अवसर देने के साथ-साथ राज्य में बागवानी क्षेत्र को और समृद्ध बनाने का मार्ग प्रशस्त करेंगी।
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