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ओडिशा सरकार का ग्रामीण विकास पर फोकस

  •  कनेक्टिविटी मजबूत करने को बनेगी 500 किमी आपदा-रोधी ग्रामीण सड़कें

  •  1,000 करोड़ की लागत से होगा निर्माण

भुवनेश्वर। ओडिशा सरकार ने ग्रामीण कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचा योजना की घोषणा की है। इस पहल के तहत राज्य के आपदा प्रभावित क्षेत्रों में करीब 500 किलोमीटर लंबी ग्रामीण सड़कों का उन्नयन किया जाएगा, जिस पर लगभग 1,000 करोड़ रुपये का निवेश होगा।

ग्रामीण विकास विभाग द्वारा जारी प्रस्ताव के अनुसार, यह परियोजना एमएमएसवाई–डिजास्टर रेजिलिएंट रोड्स स्कीम के तहत लागू की जाएगी। इसे वित्तीय वर्ष 2025-26 से 2029-30 तक पांच वर्षों में पूरा किया जाएगा और पूरा खर्च राज्य सरकार स्वयं वहन करेगी।

सभी मौसमों में उपयोग योग्य होंगी सड़कें

विभाग ने स्पष्ट किया है कि इन सड़कों का निर्माण सभी मौसमों में उपयोग योग्य और आपदा-रोधी ढांचे के रूप में किया जाएगा। परियोजना के पूरा होने पर आपदा प्रभावित क्षेत्रों में परिवहन व्यवस्था निर्बाध बनी रहेगी, लोगों की बुनियादी सेवाओं तक पहुंच आसान होगी और ग्रामीण इलाकों की कनेक्टिविटी और मजबूत होगी।

अधिकारियों का कहना है कि यह पहल ओडिशा सरकार की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जिसके तहत राज्य को प्राकृतिक आपदाओं से जूझने के बावजूद टिकाऊ और सुरक्षित ग्रामीण विकास की दिशा में आगे बढ़ाया जाएगा।

ओडिशा को मिला 240 करोड़ से अधिक का अनुदान

इधर, ओडिशा को पंचायती राज संस्थाओं के विकास के लिए वित्त वर्ष 2025-26 में पंद्रहवें वित्त आयोग की पहली किस्त के रूप में 240.81 करोड़ रुपये का अनुदान प्राप्त हुआ है। इस चरण में अनुदान पाने वाले राज्यों में ओडिशा के साथ मिजोरम और त्रिपुरा भी शामिल हैं।

6,085 ग्राम पंचायतों और 63 पंचायत समितियों के बीच वितरित

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, यह राशि 6,085 ग्राम पंचायतों और 63 पंचायत समितियों के बीच वितरित की जाएगी। वहीं, मिजोरम को वर्ष 2023-24 के अनुदान के तहत 827 पात्र ग्राम परिषदों के लिए 14.27 करोड़ रुपये और त्रिपुरा को 606 ग्राम पंचायतों, 35 पंचायत समितियों, 8 जिला परिषदों और 587 ग्राम समितियों सहित 40 ब्लॉक एडवाइजरी समितियों के लिए 29.75 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं।

पंचायती राज संस्थाओं को सशक्त बनाने का उद्देश्य

यह अविनियमित अनुदान पंचायती राज संस्थाओं को सशक्त बनाने के उद्देश्य से दिया जाता है, ताकि वे स्थानीय जरूरतों के अनुरूप ग्यारहवीं अनुसूची में सूचीबद्ध 29 विषयों पर योजनाएं चला सकें। हालांकि, इस राशि का उपयोग वेतन या नियमित प्रशासनिक खर्चों में नहीं किया जा सकता।

वित्त आयोग हर साल ऐसे अनुदान दो किस्तों में जारी करता है। जहां अविनियमित अनुदान पंचायतों को लचीलापन प्रदान करते हैं, वहीं विनियमित अनुदान स्वच्छता, ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन, सुरक्षित पेयजल आपूर्ति, वर्षा जल संचयन और रीसाइक्लिंग जैसी अनिवार्य सेवाओं के लिए विशेष रूप से निर्धारित होते हैं।

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