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छोटे एवं मध्यम व्यापारियों को राहत देने के उद्देश्य से केंद्र और जीएसटी काउंसिल को सौंपी सिफारिशें
भुवनेश्वर। कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ओडिशा चैप्टर ने जीएसटी काउंसिल और वित्त मंत्रालय को जीएसटी सुधारों से संबंधित एक व्यापक सुझाव पत्र सौंपा है। इसका उद्देश्य छोटे और मध्यम व्यापारियों के लिए अनुपालन बोझ कम करना और व्यापार के अनुकूल माहौल तैयार करना है।
सुझावों में सेवाओं के लिए जीएसटी पंजीकरण की सीमा 50 लाख और वस्तुओं के लिए 1 करोड़ करने, पंजीकरण प्रक्रिया सरल बनाने तथा विवाद से बचने के लिए जीएसटीआर-3बी में संशोधन की अनुमति देने की मांग की गई है।
इनपुट टैक्स क्रेडिट पर सुधार का सुझाव
आईटीसी से जुड़े विवादों को लेकर कहा गया है कि खरीदार को केवल सिद्ध मिलीभगत की स्थिति में ही दंडित किया जाए। साथ ही व्यावसायिक उपयोग के वाहनों पर सशर्त आईटीसी की अनुमति दी जाए।
दरों का तार्किकरण
कैट ने सीमेंट, दोपहिया वाहन, स्क्रैप और आवश्यक सौंदर्य प्रसाधनों पर जीएसटी दरों में कटौती की सिफारिश की है। साथ ही बिना ब्रांड वाले पैक्ड खाद्य पदार्थों पर जीएसटी समाप्त करने की मांग की गई है, ताकि असंगठित व्यापार सुरक्षित रहे और उपभोक्ताओं को राहत मिले।
प्रक्रियागत सुधार पर जोर
कैट ने 10 करोड़ से कम टर्नओवर वाले कारोबारियों के लिए एचएसएन कोड रिपोर्टिंग से छूट देने की मांग की है। साथ ही ई-वे बिल की सीमा बढ़ाने की सिफारिश की है। ई-इनवॉइस की अनिवार्यता केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित करने की मांग की है।
वित्तीय और प्रशासनिक सुधार
ब्याज दरों को बाजार मानकों के अनुरूप करने और नियम 88बी(2) में संशोधन कर केवल नेट बकाया कर पर ही ब्याज वसूलने का सुझाव दिया गया है। इसके साथ ही लक्ष्य-आधारित कर वसूली पर रोक, अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और जीएसटी काउंसिल के अधिकार क्षेत्र में शिकायत निवारण को शामिल करने पर जोर दिया गया है।
कॉस्मेटिक उद्योग पर विशेष सुझाव
इस क्षेत्र के लिए जीएसटी दर कम करने, अंडरवैल्यूएशन व आयात पर रोक लगाने तथा नैतिक एमएसएमई को प्रमाणन योजना के जरिये प्रोत्साहित करने का प्रस्ताव रखा गया है।
इस प्रस्ताव को कैट के राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय नेताओं, बृजमोहन अग्रवाल, आरके शुक्ला, हीरालाल लोकचंदानी, सुधाकर पंडा, गोविंद अग्रवाल, जितेंद्र गुप्ता और सीए अमित कुमार दरुका ने समर्थन दिया है।
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