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दो बार फेल होने पर नहीं मिलेगा प्रमोशन
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स्कूल एवं जन शिक्षा विभाग ने जारी की गजट अधिसूचना
भुवनेश्वर। ओडिशा सरकार ने प्रारंभिक शिक्षा नीति में बड़ा बदलाव करते हुए कक्षा 5 और 8 के छात्रों के लिए वार्षिक परीक्षा को फिर से अनिवार्य कर दिया है। यह नियम सरकारी और निजी दोनों प्रकार के स्कूलों में लागू होगा और आगामी शैक्षणिक वर्ष 2025-26 से प्रभावी होगा। स्कूल एवं जन शिक्षा विभाग द्वारा जारी गजट अधिसूचना के अनुसार, जो छात्र वार्षिक परीक्षा में पास नहीं कर पाएंगे, उन्हें दो माह की विशेष शिक्षा (रीमेडियल क्लास) दी जाएगी। उसके बाद दोबारा परीक्षा होगी और अगर छात्र उसमें भी असफल रहते हैं तो उन्हें अगली कक्षा में प्रोन्नत नहीं किया जाएगा।
हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि ‘राइट टू एजुकेशन’ एक्ट के तहत किसी भी छात्र को कक्षा 8 तक स्कूल से निकाला नहीं जाएगा। छात्रों को स्कूल में बनाए रखने और उनकी पढ़ाई को मज़बूत करने के लिए यह निर्णय लिया गया है। रीमेडियल शिक्षा के दौरान शिक्षक बच्चों के माता-पिता से भी नियमित संवाद करेंगे और उनके शैक्षणिक कमजोरियों को दूर करने में सहयोग करेंगे।
प्राथमिक शिक्षा को मजबूत करने की पहल
इस संशोधित नियम के साथ ही सरकार ने जून माह में एक और बड़ा कदम उठाया था, जिसमें 45,000 से अधिक सरकारी स्कूलों में संचालित ‘शिशु वाटिकाओं’ के लिए ‘शिशु सेविकाओं’ की नियुक्ति को मंजूरी दी गई थी। ये सेविकाएं 5–6 वर्ष के बच्चों को कक्षा के माहौल में सहज बनाने, भावनात्मक देखभाल और दिनचर्या में सहायता करने का कार्य करेंगी।
शिशु सेविकाओं को नहीं मिलेगी अन्य जिम्मेदारी
शिशु सेविकाओं को शिक्षण कार्य या अनुशासनात्मक जिम्मेदारियों से दूर रखा जाएगा, लेकिन वे शिक्षकों के साथ मिलकर बच्चों की देखभाल, भोजन वितरण, स्वच्छता और अन्य सहायक कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाएंगी। सरकार का यह मानना है कि प्रारंभिक शिक्षा के स्तर पर बेहतर देखभाल से बच्चों का शैक्षणिक आधार मजबूत होगा और उनकी सीखने की गति में सुधार आएगा।
इस नई नीति के लागू होने से छात्रों की शैक्षणिक गुणवत्ता और बुनियादी शिक्षा व्यवस्था में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।
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