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ओडिशा में बनेगा भारत का दूसरा सबसे लंबा रेलवे वायाडक्ट

  • खुर्दा रोड-बलांगीर रेल लाइन पर बुगुड़ा से बणिगोछा तक अगस्त 2026 तक होगा तैयार

भुवनेश्वर। ओडिशा जल्द ही भारत के दूसरे सबसे लंबे रेलवे वायाडक्ट (रेल पुल) का गवाह बनने जा रहा है। ईस्ट कोस्ट रेलवे (इकोर) के अनुसार, यह 4.77 किलोमीटर लंबा भव्य वायाडक्ट खुर्दा रोड–बलांगीर नई रेलवे लाइन के अंतर्गत बुगुड़ा और बणिगोछा स्टेशनों के बीच बनाया जा रहा है, जो अगस्त 2026 तक पूरा होने की संभावना है।

इस वायाडक्ट की सबसे ऊंची पायन (खंभा) 26 मीटर की होगी, जो इसे असम के ब्रह्मपुत्र नदी पर बने प्रतिष्ठित बोगीबील ब्रिज के बाद दूसरा सबसे ऊंचा रेलवे पुल बनाता है।

नयागढ़ जिले के दुर्गम इलाके में हो रहा निर्माण

यह वायाडक्ट नयागढ़ जिले के जमुसाही गांव से गुराह गांव तक फैला हुआ है, जो दूरस्थ और वन क्षेत्र से होकर गुजरता है। इसका उद्देश्य राज्य के आंतरिक हिस्सों में रेल संपर्क को सशक्त बनाना है।

इस वृहद परियोजना के तहत इंजीनियरिंग चुनौतियों से निपटते हुए पुलों, सुरंगों और अन्य बुनियादी संरचनाओं का निर्माण किया जा रहा है। यह पूरा कार्य 269 करोड़ रुपये के अनुबंध के अंतर्गत राही ग्रुप को सौंपा गया है, जो 123 किमी से 143 किमी की 20 किलोमीटर लंबी रेल पटरी पर फैला है। अब तक 98 फाउंडेशन, 62 बेड ब्लॉक और 41 स्पैन गर्डर का काम पूरा हो चुका है।

दृश्यात्मक और टिकाऊ रेल यात्रा का वादा

यह वायाडक्ट खुर्दा रोड–बलांगीर रेल परियोजना के अंतर्गत चल रही कई बड़ी निर्माण योजनाओं में से एक है, जिसका उद्देश्य न केवल परिवहन सुविधा बढ़ाना है, बल्कि यात्रियों को एक शानदार प्राकृतिक रेल यात्रा का अनुभव भी प्रदान करना है।

बौध जिले में भी 1,257.6 मीटर लंबा एक अन्य वायाडक्ट निर्माणाधीन है, जबकि दासपल्ला से पुरानाकटक तक की 75 किलोमीटर की रेललाइन पूर्वी भारत की सबसे सुंदर रेल मार्गों में गिनी जा रही है।

इस परियोजना में 12.7 किलोमीटर लंबी सुरंगें भी बनाई जा रही हैं, जिनमें सबसे लंबी सुरंग 4.18 किलोमीटर की होगी। इन सुरंगों को वन्य जीवन और पर्यावरण को कम से कम नुकसान पहुंचाते हुए डिजाइन किया गया है।

पर्यावरण-संवेदनशीलता के साथ अधुनातन निर्माण

नयागढ़ और बौध के वन क्षेत्रों की पारिस्थितिकी को ध्यान में रखते हुए ईस्ट कोस्ट रेलवे ने इस परियोजना में कई पर्यावरणीय सुरक्षा उपाय शामिल किए हैं। इनमें वन्यजीवों की आवाजाही के लिए विशेष पासेज, ऊंचे वायाडक्ट और सुरंग निर्माण शामिल हैं ताकि वनों की कटाई और जीव-जंतुओं के आवागमन पर प्रभाव न पड़े।

रेलवे का अनुमान है कि इन उपायों से लगभग दो लाख पेड़ संरक्षित किए जा सकेंगे और हाथियों सहित अन्य वन्यजीवों के पारंपरिक रास्तों पर निर्बाध आवाजाही संभव होगी।

यात्रियों और मालवाहन दोनों के लिए वरदान

परियोजना पूर्ण होने के बाद खुर्दा रोड–बलांगीर रेल मार्ग ओडिशा के भीतरी इलाकों को मुख्य रेल नेटवर्क से जोड़ेगा। यह न केवल यात्रियों की यात्रा को आसान बनाएगा, बल्कि माल ढुलाई में भी समय और लागत की बचत करेगा।

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