
प्रमोद कुमार प्रुष्टि, पुरी
भक्त विहीन रथयात्रा निकाले जाने के कारण आज महाप्रभु श्रीजगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा के तीनों रथ बहुत ही जल्द गुंडिचा मंदिर पहुंच गये. हालांकि इससे पहले की रथयात्राओं में भीड़ अधिक होने के कारण रथों को गुंडिचा मंदिर पहुंचने में काफी वक्त लगता था. कई बार तो महाप्रभु का रथ देर रात तक गुंडिचा मंदिर पहुंचता था या विलंब होने के कारण दूसरे दिन भी गुंडिचा मंदिर पहुंचता था.

आज भगवान बलभद्र का रथ तालध्वज सबसे पहले 3.52 जबे, देवी सुभद्रा का दर्पदलन 4.11 बजे तथा महाप्रभु श्री जगन्नाथ का रथ नंदीघोष शाम 5.10 बजे गुंडिचा मंदिर पहुंचा. आज रथों पर देवों सूखा भोग चढ़ाया गया. विभिन्न मठों की ओर यह चढ़ाया जाता है. कल गुंडिचा मंदिर गोटी पहंडी के माध्यम से अढप मंडप विजे कराया जायेगा और गुरुवार से गुंडिचा मंदिर में अढप मंडप प्रसाद चढ़ाया जायेगा, लेकिन भक्तों के लिए मंदिर में यह उपलब्ध नहीं होगा. इस प्रसाद को सेवायतों के माध्यम से फोन के जरिये बुक कराये जाने की व्यवस्था पर विचार चल रहा है. बुझिया के माध्यम से यह प्रसाद घरों तक पहुंचाया जा सकता है.

रथों पर सेवायतों की संख्या रही कम
हर साल की तुलना में आज की रथयात्रा में रथों पर सेवायतों की संख्या काफी कम रही. आज भक्तों की जगह सेवायतों और पुलिसकर्मियों ने मिलकर रथों खिंचा तथा गुंडिचा मंदिर तक ले गये. नंगे पैर सेवायत रथों को खिंचकर गुंडिचा मंदिर तक ले गये, जबकि भक्त जूते-चप्पल पहनकर रथों को खिंचते थे. नंगे पैर होने के कारण सड़कों पर पानी का छिड़काव किया जाता रहा.
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