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प्रधानमंत्री को लिखा पत्र
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पश्चिम बंगाल द्वारा दीघा मंदिर को ‘जगन्नाथ धाम’ कहे जाने पर जताई आपत्ति
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पुरी को बताया एकमात्र और मूल ‘जगन्नाथ धाम’
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धार्मिक आस्था को ठेस पहुंचाने का लगाया आरोप
भुवनेश्वर। विश्वप्रसिद्ध रेत कलाकार पद्मश्री सुदर्शन पटनायक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखकर पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा हाल ही में दीघा में बनाए गए नए मंदिर को ‘जगन्नाथ धाम’ कहे जाने पर गहरी आपत्ति जताई है। पटनायक ने इसे धार्मिक आस्था को ठेस पहुंचाने वाला कदम बताते हुए कहा कि पुरी ही हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार मूल और एकमात्र जगन्नाथ धाम है और किसी अन्य स्थान को इस नाम से पुकारना अनुचित, भ्रामक और अपमानजनक है।
अपने पत्र में पटनायक ने लिखा है कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री द्वारा दीघा में बने नए मंदिर को ‘जगन्नाथ धाम’ कहे जाने की घोषणा सार्वजनिक रूप से की गई है, जिससे महाप्रभु श्री जगन्नाथ के करोड़ों श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।
पटनायक ने लिखा कि श्री जगन्नाथ को समर्पित एक नया मंदिर बनाना निःस्संदेह सराहनीय और स्वागतयोग्य है, लेकिन उसे ‘जगन्नाथ धाम’ कहना धार्मिक दृष्टिकोण से अत्यंत आपत्तिजनक है। यह न केवल भावनाओं को आहत करता है बल्कि धार्मिक परंपराओं और शास्त्रों के विरुद्ध भी है।
धार्मिक भ्रम और सांस्कृतिक विरासत को नुकसान
पटनायक ने यह स्पष्ट किया कि आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित चार पवित्र धामों में से एक जगन्नाथ धाम पुरी ही है। ऐसे में दीघा को ‘धाम’ के रूप में प्रस्तुत करना न केवल अनुचित है, बल्कि यह धार्मिक भ्रम भी उत्पन्न करता है। उन्होंने कहा कि हमारे शास्त्रों में जगन्नाथ धाम के रूप में केवल पुरी को ही मान्यता प्राप्त है। यह स्थान हजारों वर्षों से करोड़ों भक्तों की आस्था का केंद्र रहा है। किसी अन्य स्थान को इस नाम से पुकारना इस परंपरा की पवित्रता को कम करता है।
प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप की मांग
पटनायक ने प्रधानमंत्री मोदी से इस विषय पर संज्ञान लेने और आवश्यक कार्रवाई करने का आग्रह किया है। उन्होंने अपने पत्र में लिखा कि आपका महाप्रभु श्री जगन्नाथ के प्रति अगाध प्रेम और ओडिशा की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखने की आपकी प्रतिबद्धता सर्वविदित है। अतः मैं आपसे इस विषय में हस्तक्षेप की प्रार्थना करता हूं ताकि धार्मिक परंपराओं की गरिमा और श्रद्धालुओं की भावनाओं की रक्षा हो सके।
भारत की सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा विषय
पटनायक, जिन्होंने विश्व मंचों पर अपने रेत कला के माध्यम से भारत और विशेष रूप से जगन्नाथ संस्कृति को सम्मान दिलाया है, ने इस पूरे मुद्दे को भारत की सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा मामला बताया। उन्होंने कहा कि पुरी का श्री जगन्नाथ मंदिर न केवल एक तीर्थस्थल है, बल्कि यह भारत की आध्यात्मिक आत्मा का प्रतीक है। ऐसे में किसी अन्य स्थान को उसी नाम से पुकारना ऐतिहासिक और धार्मिक रूप से गलत है।
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