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एसीएफ सौम्य रंजन महापात्र की मौत मामले में फिर से जांच की मांग 

  • विधायक पद्मलोचन पंडा ने विधानसभा में उठाया मुद्दा

भुवनेश्वर। ओडिशा के विधायक पद्मलोचन पंडा ने गजपति जिले में चार साल पहले हुई सहायक वन संरक्षक (एसीएफ) सौम्य रंजन महापात्र की रहस्यमयी मौत मामले में नई जांच की मांग की है। बुधवार को विधानसभा में शून्यकाल के दौरान सिमुलिया से भाजपा विधायक पद्मलोचन पंडा ने इस मामले में पूर्व वन मंत्री और प्रभागीय वन अधिकारी (डीएफओ) की भूमिका पर सवाल उठाते हुए केस की फिर से जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि सौम्य रंजन के परिवार को न्याय दिलाने के लिए इस मामले की गहन जांच होनी चाहिए।

सौम्य रंजन महापात्र 12 जुलाई 2021 को परलाखेमुंडी स्थित अपने आवास पर जलने की स्थिति में गंभीर हालत में पाए गए थे। अगले दिन कटक के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।  परिवार ने घटना के दो दिन बाद गजपति के पूर्व डीएफओ संग्राम बेहरा, सौम्य रंजन की पत्नी विद्या भारती और रसोइया मनमथ कुंभा के खिलाफ हत्या का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई थी।

अपराध शाखा की जांच में क्लीन चिट 

राज्य सरकार ने 14 अगस्त 2021 को मामले की जांच अपराध शाखा को सौंपी थी। 8 अक्टूबर 2021 को अपराध शाखा ने डीएफओ बेहरा और कुंभा को क्लीन चिट दे दी और विद्या भारती को आईपीसी की धारा 304-ए (लापरवाही से मौत का कारण) और धारा 285 (आग या ज्वलनशील पदार्थ के संबंध में लापरवाही) के तहत आरोपित किया।

घटना को ‘दुर्घटनावश मृत्यु’ करार दिया

अपराध शाखा ने घटना को ‘दुर्घटनावश मृत्यु’ करार दिया और कहा कि बेहरा और कुंभा की इस मामले में कोई भूमिका नहीं है। साथ ही, विद्या भारती और डीएफओ के बीच किसी भी प्रकार के संबंध के प्रमाण नहीं मिले।

जांच में अनियमितता का आरोप 

विधायक पंडा ने जांच में अनियमितता का आरोप लगाते हुए कहा कि मामले में सभी पहलुओं की नए सिरे से जांच होनी चाहिए। उन्होंने न्याय सुनिश्चित करने के लिए केस फाइलों को फिर से खोलने की मांग की है।

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