भुवनेश्वर। ओड़िया साहित्य के सबसे प्रसिद्ध आधुनिकतावादी कवि और पद्मभूषण पुरस्कार प्राप्त रामकांत रथ का रविवार को निधन हो गया। वे 90 वर्ष के थे।
रथ ने आज सुबह अपने आवास खारवेल नगर, भुवनेश्वर में अंतिम सांस ली। रामकांत रथ का जन्म 13 दिसंबर 1934 को कटक में हुआ था। उन्होंने अंग्रेजी में मास्टर डिग्री प्राप्त करने के बाद 1957 में भारतीय प्रशासनिक सेवा में शामिल हुए।
उन्होंने ओडिशा के मुख्य सचिव के पद से सेवानिवृत्त होने से पहले केंद्रीय सरकार में कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया, जिसमें भारत सरकार के सचिव का पद भी शामिल था।
रथ के करियर में कई पुरस्कारों का समावेश है, जिनमें 1977 में साहित्य अकादमी पुरस्कार, 1992 में सरस्वती सम्मान, 1990 में बिषुब सम्मान और 2006 में भारत का तीसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान, पद्मभूषण शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त, रथ ने 1993 से 1998 तक साहित्य अकादमी, भारत के उपाध्यक्ष के रूप में कार्य किया और 1998 से 2003 तक इसके अध्यक्ष रहे। फरवरी 2009 में उन्हें केंद्रीय साहित्य अकादमी द्वारा साहित्य अकादमी फेलोशिप से सम्मानित किया गया, और वे इस सम्मान को प्राप्त करने वाले ओड़िया लेखकों में पांचवें व्यक्ति बने।
रामकांत रथ की कविताएँ, जिनकी गहराई और समझ की सराहना की जाती थी, में “श्री राधा”, “सप्तम ऋतु”, “केते दिनर”, “अनेक कोठरी”, “संदिग्ध शिकार” और “सचित्र अंधार” जैसी प्रमुख कविताएँ शामिल हैं।
उनका निधन ओड़िया साहित्य की दुनिया में एक युग के समाप्त होने का प्रतीक है और साहित्यिक जगत में गहरी शोक लहर है।
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