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सुलोचना दास ने गंभीर सवाल उठाए
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पूछा-महिलाओं को 5,000 रुपये देकर आत्मनिर्भर बनाने का दावा कैसे कर सकती है सरकार
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क्या इतनी कम राशि से महिलाएं हो सकती हैं आर्थिक रूप से सशक्त
भुवनेश्वर। ओडिशा सरकार की प्रमुख सुभद्रा योजना को लेकर भुवनेश्वर की मेयर सुलोचना दास और भाजपा विधायक बाबू सिंह के बीच तीखी बहस छिड़ गई है। सुभद्रा रैली के दौरान दोनों नेताओं ने इस योजना की प्रभावशीलता को लेकर एक-दूसरे पर कटाक्ष किए।
रैली में भुवनेश्वर नगर निगम (बीएमसी) की मेयर सुलोचना दास ने सुभद्रा योजना को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत महिलाओं को 10,000 रुपये दो किश्तों में दिए जा रहे हैं, जबकि पिछली सरकार 15,000 रुपये से 15 लाख रुपये तक का ब्याज-मुक्त ऋण देती थी।
मेयर ने सवाल किया कि महिलाओं को 5,000 रुपये की राशि देकर सरकार उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का दावा कैसे कर सकती है? क्या इतनी कम राशि से महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त हो सकती हैं?
बाबू सिंह का पलटवार
बीएमसी मेयर के इन आरोपों पर भाजपा विधायक बाबू सिंह ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार की योजनाएं सिर्फ कागजों तक सीमित थीं और कभी धरातल पर उतरी ही नहीं। इसके विपरीत सुभद्रा योजना के तहत लाखों महिलाओं को सीधे उनके बैंक खातों में सहायता राशि भेजी गई है।
बाबू सिंह ने कहा कि जो काम वे 24 साल में नहीं कर सके, उसे हमने इतनी कम अवधि में कर दिखाया। वे अपने वोट बैंक के खिसकने से घबरा गए हैं। उन्होंने आगे कहा कि सुभद्रा योजना ने कमजोर आर्थिक वर्ग की महिलाओं को सुरक्षा और आत्मनिर्भरता का एहसास कराया है।
सुभद्रा योजना के लाभ और उपलब्धियां
इस बहस के बीच उप मुख्यमंत्री प्रभाती परिडा ने हाल ही में घोषणा की थी कि सुभद्रा योजना के तहत 1 करोड़ से अधिक महिलाओं को लाभ मिला है। उन्होंने भुवनेश्वर में आयोजित सुभद्रा मेला के दौरान बताया कि महिला स्वयं सहायता समूहों ने 5 करोड़ रुपये का व्यापार किया, जिसमें 400 से अधिक महिलाओं ने 1 लाख रुपये से ज्यादा की कमाई की।
इस मुद्दे पर मेयर और विधायक की बहस ने सुभद्रा योजना की प्रभावशीलता को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है।
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