भुवनेश्वर। ओडिशा के 100 वर्षीय स्वतंत्रता सेनानी चक्रधर प्रधान को बड़ी राहत देते हुए ओडिशा हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को पेंशन और बकाया राशि जारी करने का आदेश दिया है। प्रधान को स्वतंत्रता संग्राम के दौरान जेल में रहने के प्रमाण के अभाव में राज्य और केंद्र सरकार से पेंशन और अन्य लाभ नहीं मिल सके थे।
मयूरभंज जिले के निवासी चक्रधर प्रधान ने 1988 में पेंशन के लिए आवेदन किया था। उन्होंने दावा किया था कि वे 1 सितंबर 1942 से 5 अक्टूबर 1943 तक भूमिगत रहे और 1941-42 में बारिपदा सेंट्रल जेल में राजनीतिक कैदी के रूप में कारावास झेला।
हालांकि, उनके आवेदन को खारिज कर दिया गया था। इसके बाद, प्रधान ने 2013 में हाईकोर्ट में याचिका दायर की। राज्य सरकार ने अपने जवाब में कहा कि 1980 की योजना के तहत पेंशन के लिए पात्रता के लिए छह महीने की न्यूनतम जेल या छह महीने से अधिक भूमिगत रहने का प्रमाण जरूरी है।
हाईकोर्ट द्वारा जानकारी मांगे जाने पर जेल प्रशासन ने बताया कि घटना करीब 79 साल पुरानी होने के कारण संबंधित जानकारी रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं है।
इस पर न्यायमूर्ति शशिकांत मिश्र ने कहा कि इतने पुराने मामले में स्पष्ट प्रमाण प्रस्तुत करना याचिकाकर्ता के लिए अत्यधिक कठिन है। उन्होंने कहा कि ऐसे में याचिकाकर्ता के दावे पर सहानुभूतिपूर्ण विचार करना आवश्यक है।
हाईकोर्ट के इस आदेश से स्वतंत्रता संग्राम में योगदान देने वाले सेनानियों के प्रति सम्मान और उनकी न्याय की लड़ाई को बल मिला है।
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