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ओडिशा में अब भी जिंदा हैं महाचक्रवात की दर्दनाक यादें

  • 25 साल पहले 29 अक्टूबर 1999 को आया था महाविनाशक चक्रवात

  • 9000 से ज्यादा लोगों की जान, लाखों हुए थे प्रभावित

भुवनेश्वर। 29 अक्टूबर 1999 को ओडिशा में तबाही का एक काला दिन साबित हुआ था, जब पारादीप के पास सुपर साइक्लोन ने 260 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दस्तक दी। तूफान के साथ तेज बारिश, छह से सात मीटर ऊंची ज्वारीय लहरों और बाढ़ ने तटीय जिलों में भयंकर तबाही मचाई थी। इस आपदा में आधिकारिक रूप से 9000 से अधिक लोगों की जान गई, हालांकि, असल मौत का आंकड़ा इससे कहीं अधिक माना जाता है।

सुपर साइक्लोन, जिसे पारादीप साइक्लोन के नाम से भी जाना जाता है, ने 250 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से ओडिशा के तटीय क्षेत्रों में तबाही मचाई थी। इसने संधाकुड बस्ती को पूरी तरह बर्बाद कर दिया और भुवनेश्वर व कटक सहित 14 जिलों और 28 शहरों को प्रभावित किया था।

रिपोर्ट्स के अनुसार, इस तूफान से लगभग 1.3 करोड़ लोग प्रभावित हुए, जिनमें 33 लाख बच्चे, 50 लाख महिलाएं और करीब 35 लाख बुजुर्ग शामिल थे। 7000 से अधिक लोग घायल हुए, 3 लाख से अधिक पशुओं की मृत्यु हुई और 16 लाख से अधिक मकान क्षतिग्रस्त हुए।

कुछ लोग अपनी जान बचाने में कामयाब रहे, लेकिन कई ने अपने परिवार और प्रियजनों को खो दिया। पीड़ितों के शव सड़कों पर बिखरे हुए थे। उस समय की दर्दनाक यादें लोगों को आज भी सताती हैं।

एक पीड़िता ने कहा कि मैंने अपनी नौ साल की बेटी और ससुर को इस चक्रवात में खो दिया। मेरा घर पूरी तरह तबाह हो गया था। यह विनाशकारी घटना आज भी मुझे दर्द देती है।

सुपर साइक्लोन के एक अन्य पीड़ित बुधेश्वर कांडी ने कहा कि जब मैं अपने घर लौटा तो वह मलबे में तब्दील हो चुका था। मैंने अपनी मां को कंधे पर उठाया था, लेकिन एक विशाल लहर हमें बहा ले गई। तीन दिन बाद मुझे मेरी मां का शव मिला और मैंने उनका अंतिम संस्कार किया।

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