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शव पर माला चढ़ाकर दी अंतिम विदाई
भुवनेश्वर। भुवनेश्वर स्थित नंदनकानन जूलॉजिकल पार्क में 18 वर्षीय बाघ ‘नंदन’ की मौत को लेकर पार्क ने शोक जताया है। बताया गया है कि कुछ दिनों से बढ़ती उम्र से जुड़ी जटिलताओं को लेकर उसका इलाज चल रहा था। इसे कमर से संबंधित समस्या थी जिसका इलाज आर्थोपेडिक विभाग कर रहा था। इसने अपने आखिरी दिन चिड़ियाघर के बाड़े नंबर 31 में बिताया था।
इसे पहली बार 24 मार्च 2013 को चिड़ियाघर के सफेद बाघ सफारी क्षेत्र के पास देखा गया था। इसके बाद इसे चिड़ियाघर में अक्सर देखा जाने लगा। बाद में बाघ को ‘नंदन’ नाम दिया गया और केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण, नई दिल्ली की अनुमति से चिड़ियाघर में रखा गया। जब इसे यहां रखा गया, तो उस समय इसकी आयु मात्र सात वर्ष थी।
चिड़ियाघर के सूत्रों के अनुसार, नंदन ने संरक्षण प्रजनन कार्यक्रम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसने दो बाघिनों से कुल नौ शावक पैदा किए। अब इस बाघ के निधन के बाद अधिकारियों ने शोक जताया तथा अपनी श्रद्धा अर्पित की। अधिकारियों और कर्मचारियों ने उसके शव पर पुष्प का माला चढ़ा तथा अंतिम विदाई दी।
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